दमोह में नौरादेही और रानी दुर्गावती अभ्यारण्य को मिलाकर बनाए गए नए टाइगर रिजर्व को नए साल से पहचान मिल जाएगी। इसे रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व से ही पहचाना जाएगा और अन्य टाइगर रिजर्व की तरह यहां भी सभी नियम कानून लागू हो जाएंगे। इसके लिए प्रशासनिक तैयारियां तेजी से चल रही हैं। कर्मचारियों के रहने के लिए आवास बनाए जाने लगे हैं।
बता दें कि प्रदेश में 7वां और बुंदेलखंड का दूसरा टाइगर रिजर्व बनाया गया है, जिसमें दमोह को रानी दुर्गावती अभ्यारण्य और सागर जिले के नौरादेही अभ्यारण्य को मिलाया गया है। वर्तमान में नौरादेही अभ्यारण्य में 15 बाघ हैं, जिनकी संख्या बढ़ भी सकती है। नए टाइगर रिजर्व के संबंध में सागर सीसीएफ ने एक बैठक भी ली थी, जिसमें नौरादेही डीएफओ, दमोह डीएफओ के आलवा सभी रेंजर शामिल हुए थे।
जानकारी यह मिल रही है कि इसके लिए स्टाफ कहां से आएगा। यदि टाइगर रिजर्व क्षेत्र बनता है तो उसके लिए क्षेत्र को कितने भागों में बांटा जाएगा और यहां पदस्थ होने वाले कर्मचारी कहां से आएंगे और इनका संचालन कौन करेगा। ऐसे अनेक सवाल लोगों के मन में बने हुए हैं। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि गांव का विस्थापन होगा, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि किसी भी गांव का विस्थापन नहीं होगा। लेकिन जंगल को तीन भागों में बांटा जाएगा।
ऐसे बनेंगे तीन भाग
टाइगर रिजर्व बनने के बाद जंगली क्षेत्र को तीन भांगों में बांटा जाएगा। पहला भाग कोर एरिया होगा, जिसका मतलब होता है पूरी तरह संरक्षित। इस क्षेत्र में आम लोगों का आवागमन पूर्ण रूप से प्रतिबंध होता है। दूसरा एरिया होगा इको सेंटटिव एरिया होगा, इसमें दो किलोमीटर तक का जंगल छोड़ा जाता है। यहां पर आम लोग जिनमें ग्रामीण, मवेशी आ और जा सकते हैं। तीसरा बफरजोन एरिया इसमें ग्राम राजस्व का क्षेत्र आता है। इसमें आवागमन सुचारू रूप से चल सकता है। किसी तरह का कोई प्रतिबंध नहीं होगा। जानकारी ये भी मिल रही है कि जो ग्राम कोर एरिया में आते होंगे, उनको वहां से भविष्य में हटाया जा सकता है।
तेजगढ़ रहेगा सब डिवीजन
टाइगर रिजर्व में दमोह के वन विभाग का काफी क्षेत्र गया है। इसमें तेंदूखेड़ा रेंज, तेजगढ़ रेंज, तारादेही रेंज का भाग गया है। लेकिन झलौन रेंज की काफी बीट चली गई है। इसलिए जानकारी यह मिल रही है, जो नए साल में अब तीन अलग से रेंज बनाई जाएगी, जिनमें झलौन को सामान्य वन क्षेत्र से हटाकर टाइगर रिजर्व की रेंज बनाई जाएगी। साथ ही तेजगढ़ को दो भागों में बांटा गया है। एक टाइगर रिजर्व की, जो रेंज बनेगी उसका नाम तो तेजगढ़ ही रहेगा। मगर उसका कार्यालय जबेरा में होगा। इसके आलवा तीसरी रेंज सिंगोरगढ़ में बनाई जाएगी। सूत्रों से यह भी जानकारी मिल रही है कि इन सभी रेंजों की निगरानी के लिए एक उपवन मंडल अधिकारी अलग से होगा, जिसका सब डिवीजन तेजगढ़ में बनने की जानकारी मिल रही है।
तेंदूखेड़ा ब्लाक के सर्रा सेक्टर के अंतर्गत आने वाले सभी गांव पहले से ही नौरादेही की सर्रा रेंज में आते हैं, जिनमें अभी तक नौरादेही के नियम क़ानून चलते थे, लेकिन अब टाइगर रिजर्व में जो क्षेत्र गया है वह सभी स्थान नये साल से टाइगर रिजर्व के नियमों के साथ चलेंगे। जो आज सामान्य वन में पदस्थ कर्मचारी हैं, वह भी टाइगर रिजर्व के कर्मचारी कहलाने लगेंगे और उनकी वेतन टाइगर रिजर्व के नियमों के तहत ही जारी होगी। टाइगर रिजर्व की मंजूरी मिलने के बाद सबसे पहले झलौन में निर्माण कार्य टाइगर रिजर्व द्वारा शुरू कर दिया है। झलौन में अलग से कर्मचारियों के रहने के लिए शासकीय भवन बनाए जाने लगे हैं।
दमोह वन मंडल अधिकारी एमएम उइके ने बताया कि टाइगर रिजर्व का क्षेत्र सामन्य वन क्षेत्र से अलग करने की प्रकिया तेजी से चल रही है और नये साल में उस क्षेत्र में टाइगर रिजर्व के नियम लागू हो जायेंगे। जो क्षेत्र दमोह वन मंडल से अलग हुआ है। टाइगर रिजर्व के लिए दमोह में तीन रेंज बनाई जा रही है, जिनमें झलौन, तेजगढ़ और सिंगोरगढ़ हैं।