दमोह के बड़ा पुल स्थित जिस अवैध पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट से तीन लोगों की मौत हुई और 11 महिलाएं घायल हुई हैं, उस पर मामला दर्ज हो गया है। अब अस्पताल में इलाजरत महिलाओं ने धमाके के पहले की कहानी बयां की है। बताया कि सभी महिलाएं एक ही कमरे में बैठकर पटाखे बना रही थीं और फैक्ट्री मालिक अभय गुप्ता बारूद से मिक्चर बना रहा था।
घायल आरती चक्रवती ने बताया कि वह 2700 रुपए मजदूरी में इस पटाखा फैक्ट्री में काम करती थी। घटना के समय करीब 17 महिलाएं थीं जो एक कमरे में बैठकर पटाखे बना रही थीं और मालिक अभय दूसरे कमरे में बैठकर बारूद का मिक्चर बना रहा था। जैसे ही विस्फोट हुआ मकान का मलबा महिलाओं के ऊपर गिरा, उसके बाद पता नहीं क्या हुआ। घायल सुशीला चक्रवती ने बताया कि रोजगार है नहीं, बच्चे पालने के लिए कुछ तो करना होगा। इसलिए एक साल से इस पटाखा फैक्ट्री में काम करने लगी। विस्फोट अचानक हुआ किसी की समझ में कुछ नहीं आया।
पटाखा रखने की अनुमति और चल रही थी फैक्ट्री
बड़े पुल पर पिछले 10 साल से पटाखा फैक्टरी चल रही थी। मालिक अभय उर्फ छुट्टन गुप्ता 400 किलो पटाखा रखने और बेचने के लाइसेंस की आड़ में अवैध फैक्टरी चला रहा था। विस्फोट से एक किमी दूर तक की जमीन थर्रा गई और लोगों को लगा कि भूकंप आया और विस्फोट से फैक्टरी ढह गई। आसपास के लोगों और पुलिस ने मलबे से मजदूर महिलाओं को निकालकर अस्पताल पहुंचाया।
आईजी-कमिश्नर पहुंचे दमोह
मंगलवार शाम दमोह पहुंचे कमिश्नर वीरेंद्र रावत और आईजी प्रमोद वर्मा ने भी जांच की बात कही। कमिश्नर रावत ने कहा कि प्राइमरी जांच चल रही है। सागर मेडिकल कॉलेज की टीम भी बुलाई गई है। एडीएम की अध्यक्षता में एक टीम गठित की गई है, जो 15 दिन में इस मामले की जांच कर रिपोर्ट उन्हें सौंपेगी। जब उनसे कहा गया कि पहले भी इस मामले में शिकायत हुई है, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई, तो उन्होंने कहा कि जांच में इस बिंदु को भी शामिल किया जाएगा। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।
आईजी वर्मा ने कहा कि दमोह हादसे में तीन लोगों की मौत हुई है। 11 घायल हुए हैं। चार को जबलपुर रेफर किया गया है। हमारी जबलपुर कमिश्नर से बात हुई है। वहां एंबुलेंस को तत्काल अस्पताल पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया। सभी का बेहतर इलाज चल रहा है। जो घायल दमोह में भर्ती हैं। उनके बेहतर इलाज की व्यवस्था की जा रही है। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में धारा-304 के तहत मामला दर्ज किया गया है।
आर्सेनिक, एल्युमिनियम, पोटेशियम क्लोराइड जब्त
पटाखा बनाने में आर्सेनिक, एल्यूमिनियम और पोटेशियम क्लोराइड पाउडर को निश्चित मात्रा में मिलाया जाता है। ये अत्यधिक ज्वलनशील होता है, इसलिए इसे लकड़ी के उपकरण से मिलाया जाता है। एक बार में 500 ग्राम से ज्यादा मिश्रण नहीं बनाने का नियम है, लेकिन फैक्ट्री में एक साथ 50 किलो मिश्रण बना लिया और इसे धातु के उपकरणों से मिलाया जा रहा था। इसी दौरान घर्षण के कारण मिश्रण में विस्फोट हो गया। बम स्क्वॉड टीम जब यहां पहुंची तो विस्फोटक सामग्री भी अलग-अलग जगह मिली। टीम ने सामग्री जब्त कर
ली है।
एक और महिला की मौत!
पटाखा फैक्ट्री में घायल 4 लोगों को इलाज के लिए जबलपुर भेजा गया था जहां इलाज के दौरान रामकली कोष्टी की मौत की हो गई। फिलहाल शव का पंचनामा एवं पोस्टमार्टम कार्रवाई जबलपुर में की जा रही है। हालांकि अभी आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। मंगलवार को फैक्ट्री में हुए विस्फोट में मालिक अभय गुप्ता, रिंकी कोरी, अपूर्वा खटीक की मौत धमाके के दौरान हो गई थी।