दो हजार का नोट चलन से बाहर होने के बाद बाजार से भी यह गायब हो गया है और करीब 34 करोड़ रुपए के नोट बैंकों में जमा हुए हैं। नोट वापसी की प्रक्रिया 23 मई 2023 से शुरू हुई और अभी तक जिले से लगभग 34 करोड़ रुपये की राशि के नोट विभिन्न बैंकों में जमा कराए जा चुके हैं। बता दें नोट बदलने की यह प्रक्रिया 30 सितंबर तक चलेगी। इसके बाद इनका चलन धीरे-धीरे बंद हो जाएगा।
इधर बाजारों से अब दो हजार रुपये के नोट लगभग गायब हो गए हैं। बाजार में दो हजार के नोट की जगह 500 रुपये के नोट ने ले ली है। अब सबसे बड़ा नोट 500 रुपये का है। ज्यादातर लेनदेन 500 रुपये में ही हो रहा है। शहर के सभी एटीएम में 500 रुपये के नोट ही निकल रहे हैं। जिससे बाजार में 500 रुपये के नोट की भरमार हो गई है। वित्तीय संस्थाओं में भी 80 से 85 प्रतिशत तक का लेनदेन 500 रुपये के नोट के सहारे हो रहा है। इसके बाद 100 रुपये का नोट चलन में सबसे ज्यादा दिखाई देने लगा है।
इसके अलावा अब बाजार में छोटे नोट व सिक्कों की भरमार हो गई है। बैंक मैनेजर एनपी सोनी ने बताया कि दमोह जिले में दो हजार रुपये के नोट की 34 करोड़ रुपये की राशि जमा हुई हैं। अभी यह 30 सितंबर तक बैंकों में बदले जा रहे हैं। इसके बाद रिजर्व बैंक की जो गाइडलाइन आएगी, उसके अनुसार लेनदेन होगा।
बड़े कारोबारियों की बढ़ीं मुश्किलें
दो हजार रुपये के नोट चलन से बाहर होने से कुछ परेशानी भी बढ़ी है। सबसे ज्यादा परेशानी चिकित्सा संबंधी कार्यों से जाने वाले उन मरीजों के परिजनों को हो रही है जिनके बड़े ऑपरेशन संबंधी खर्चों में दो हजार रुपये के नोटों को लाने-ले जाने में आसानी रहती थी। वहीं अब दो हजार की एक गड्डी के एवज में 500 की चार गड्डियां ले जानी पड़ती हैं। बाजार के जानकार बताते हैं कि दो हजार के नोटों का बड़ा लेनदेन जमीन, भूमि, भवन के क्रय-विक्रय में होता था। लेकिन इनके चलन से बाहर होने से अब जमीन कारोबारियों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
8 नवंबर 2016 की नोटबंदी के बाद से बाजार में डिजिटल लेनदेन ज्यादा बढ़ रहा है। छोटी-छोटी शॉपिंग जिसमें सब्जी, फल, फूट, नाश्ता, रेस्टोरेंट, पेट्रोल-डीजल सेकर कॉस्मेटिक, जूते-मोजू, कपड़े, इत्यादि रोजमर्रा की खरीददारी में भी आम ग्राहक धड़ल्ले से डिजिटल माध्यम से पेमेंट करने लगे हैं। इधर व्यापारियों के जानकारों के अनुसार वर्तमान में 25 से 30 प्रतिशत तक डिजिटल लेन-देन होने लगा है। इसके कारण दुकानदारों एवं ग्राहकों दोनों को नकद लेन-देन के झंझट से मुक्ति मिली है। कार, बाइक, स्कूटर, मोबाइल फोन, लैपटॉप के दुकानदार बताते हैं कि उनके यहां तो 90 प्रतिशत तक लेन-देन डिजिटल हो गया है।