दमोह में तत्कालीन राष्ट्रपति के बेटे ने दी थी सीमेंट फैक्टरी की सौगात।
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दमोह लोकसभा सीट का इतिहास अपने आप में खास है। 1972 में यहां से तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरि के बेटे शंकर गिरि ने चुनाव लड़ा था। वह जीते भी थे। क्षैत्र में जो सीमेंट फैक्टरी है, उसने उनके कार्यकाल में ही मूर्त रूप लिया था। हालांकि, इस फैक्टरी में शहर के स्थानीय निवासियों के मुकाबले बाहरियों को ज्यादा रोजगार मिला।
दमोह लोकसभा का मिथक कहें या चुनावी रणनीति यहां बाहरी प्रत्याशियों को जीत मिलती रही है। 1972 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने तत्कालीन राष्ट्रपति वराहगिरी वेंकट गिरि (वीवी गिरि) के बेटे वराहगिरी शंकर गिरि को दमोह से चुनाव मैदान में उतारा था। इस दौर में कांग्रेस का टिकट पाने वाला व्यक्ति खुद को विजयी मान लेता था। ऐसा हुआ भी। वी. शंकर गिरि दमोह से सांसद चुने गए। चुनाव प्रचार के दौरान हेलीकाप्टर से उन्होंने पेम्फलेट जनता के बीच बांटे थे। लोगों ने उन्हें जिताकर दिल्ली भेजा था। यह अलग बात है कि उन्होंने अपने पांच वर्षीय कार्यकाल में शायद ही कभी दमोह का रुख किया। उन्होंने उद्योगों की स्थापना में जरूर योगदान किया। दमोह से 15 किमी दूर छतरपुर मार्ग पर पथरिया विधानसभा में आने वाले नरसिंहगढ़ में सीमेंट फैक्टरी खुलवाई जिसका नाम उस समय डायमंड सीमेंट फैक्टरी रखा गया था। आज यह फैक्टरी माइसेम सीमेंट फैक्टरी के नाम से पहचानी जाती है।
लोकसभा के 8 विधानसभा क्षेत्र
दमोह, हटा, जबेरा, पथरिया, बड़ा मलहरा, देवरी, रहली, बंडा हैं।
अब तक यह रहे दमोह से सांसद
- 1962 में सहोद्रा राय (कांग्रेस)
- 1967 में मणि भाई पटेल (कांग्रेस)
- 1972 में वराहगिरी शंकर गिरि (कांग्रेस)
- 1977 में नरेंद्र सिंह (भारतीय लोकदल)
- 1980 में प्रभु नारायण टंडन (कांग्रेस)
- 1984 में डालचंद जैन (कांग्रेस)
- 1989 में लोकेंद्र सिंह (भाजपा)
- 1991, 1996, 1998 और 1999 में डॉ. रामकृष्ण कुसमरिया (भाजपा)
- 2004 में चंद्रभान सिंह (भाजपा)
- 2009 में शिवराज सिंह लोधी (भाजपा)
- 2014 और 2019 में प्रहलाद पटेल (भाजपा)। प्रहलाद पटेल केंद्रीय मंत्री थे। 2023 में नरसिंहपुर से विधानसभा चुनाव जीते और अब राज्य में पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री हैं।
वोटर प्रोफाइल
कुल मतदाताः 19,09,886
पुरुष मतदाताः 10,00,952
महिला मतदाताः 9,08,902
थर्ड जेंडर मतदाताः 32