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Damoh: गंगा जमना स्कूल हिजाब-धर्मांतरण मामले में गृहमंत्री ने दिए कार्रवाई के निर्देश, बोले- बर्बाद कर देंगे

Wed, 07 Jun 2023 04:17 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर कलेक्टर ने एसडीएम, सीएसपी सहित पांच सदस्यों की टीम धर्मांतरण के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई थी। इस टीम ने संचालक को नोटिस जारी किया है।
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गंगा जमना स्कूल हिजाब विवाद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दमोह के गंगा जमुना स्कूल के हिजाब और धर्मांतरण मामले में गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने दमोह पुलिस को कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। हिंदू छात्राओं को हिजाब पहनाने का मामला धर्मांतरण तक पहुंच गया है। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि पिछले चार दिन से सबूत इकट्ठा किए जा रहे थे। जांच के आदेश तो पहले ही दे दिए गए थे। बच्चियों के बयान लिए जा रहे थे। इस तरह की मानसिकता रखने वालों को मध्यप्रदेश में पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा। पुलिस को निर्देश दिए हैं कि शुरुआती जांच में जो भी निकलकर सामने आया है उसके तहत कार्रवाई की जाए। इसके अलावा स्कूल में भारत के नक्शे से भी छेड़छाड़ का जो मामला सामने आया है, उसको लेकर भी मैंने जांच के आदेश दिए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार के द्वारा दिए बयान पर कहा, मैं उनसे बात करूंगा। शिक्षा मंत्री ने इस मामले में दमोह कलेक्टर की भूमिका संदिग्ध बताई थी।
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बता दें, स्कूल शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार ने मंगलवार को भोपाल में कहा था कि मामले में प्रथम दृष्टया डीईओ एसके मिश्रा की लापरवाही दिख रही है। डीईओ ने गलत जानकारी दी है। इसीलिए वह दोषी हैं। उनको स्कूल में निरंतर निरीक्षण करना था, जो उन्होंने नहीं किया। जब यह घटना सामने आई तो डीईओ ने जो रिपोर्ट दी, वह भी गंभीर है। रिपोर्ट में उन्होंने क्लीन चिट दी है। इसके बाद जांच करवाई गई तो स्कूल में कई कमियां मिलीं। इसलिए यह सिद्ध हो रहा है कि डीईओ ने लापरवाही जान बूझकर की है। डीईओ के खिलाफ हम कार्रवाई कर रहे हैं। 

मंत्री परमार ने कलेक्टर की भूमिका पर कहा, कलेक्टर का जो बयान और जो सारी चीजें आ रही हैं। उससे मुझे लगता है यह सिर्फ स्कूल का मामला नहीं है। स्कूल की नियम प्रक्रिया का नहीं है। यह समाज में द्वेष फैलाने का विषय है। बाल आयोग द्वारा जो स्पष्ट हुआ है, सबके सामने आया है। इसका मतलब वहां कई अवैध गतिविधियां हो रही थीं। धर्मांतरण जैसे विषय भी आए हैं। टेरर फंडिंग का विषय भी सामने आया है। ऐसे में कलेक्टर और एसपी दोनों को तत्काल जांच करना चाहिए। कलेक्टर का जो बयान बचाव में बार-बार आ रहा है, मुझे लगता है कि कलेक्टर की भूमिका भी संदिग्ध है। कलेक्टर भी उनसे मिलकर बचाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जांच में तथ्य पूरे स्पष्ट आ जाएंगे।
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दोबारा शुरू हुई थी जांच
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर कलेक्टर ने एसडीएम, सीएसपी सहित पांच सदस्यों की टीम धर्मांतरण के आरोपों की जांच के लिए बनाई गई थी। इस टीम ने संचालक को नोटिस जारी किया है। संचालक बयान देने के लिए भी नहीं पहुंचे हैं। टीम के मुताबिक पूर्व में बनाए गए बिंदुओं पर ही जांच चलेगी। महिला शिक्षकों  के धर्मांतरण को लेकर कलेक्टर मयंक अग्रवाल ने कहा था कि अभी तक किसी शिक्षिका ने इसकी शिकायत नहीं की है। बिना शिकायत इसे जांच में नहीं लिया जा सकता है और संभवतः  कलेक्टर के इसी बयान को शिक्षा मंत्री ने गंभीरता से लिया है और इसीलिए उनकी भूमिका को संदिग्ध बताया जा रहा है।

इसी मामले में जिला शिक्षा अधिकारी पर भाजपा नेताओं द्वारा स्याही तक फेंक दी और मिलीभगत का आरोप लगाया था, हालांकि जिला शिक्षा अधिकारी ने भाजपा नेताओं पर मामला दर्ज करा दिया है।
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