शक्ति की भक्ति का पर्व नवरात्र में मां के कई रूपों के दर्शन करने को मिलते हैं। इन्हीं में मां के ऐसे भक्त भी मिलते हैं, जिनकी तपस्या और साधना देखते ही बनती है। दमोह के तेंदूखेड़ा ब्लाक के दसोंदी गांव में बलखंडन माता का प्राचीन मंदिर है। यहां चैत्र नवरात्र की नवमी तिथि को माता के दरबार में पहुंचने वाले श्रद्धालु उघारे होकर दंड भरते हुए आते हैं।
बता दें कि यहां भक्तों की भीड़ देखते ही बनती है, चारों और श्रद्धालुओं की भीड़ ऐसी रहती है कि जगह भी कम पड़ जाती है। केवल वे ही लोग दंड भरते हुए आते हैं, जो घट स्थापना करते हैं। बाकी श्रद्धालु पैदल ही दर्शनों के लिए आते हैं। दसोंदी के बलखंडन माता के दरबार में पहुंचने के लिए कंकड़, पत्थरों के रास्तों में होते हुए दंड भरते बंलखड़न माता के दरबार में श्रद्धालु पहुंचते हैं। रास्ते में होने वाले कष्ट और आसमान से बरसती हुई धूप का मां के भक्तों के ऊपर कोई प्रभाव नहीं पड़ता और न ही थकान का एहसास होता है।
मीलों की दूरी तय कर पहुंचते हैं मां के दरबार...
बंलखड़न माता का चमत्कार है कि चौबीस क्षेत्र के गांव-गांव से पंडा जवारे के घट लिए मीलों की दूरी तय कर मां के दरबार तक पहुंचते हैं। सनातन काल से चली हा रही पंरपरा आज भी उसी अंदाज से निभाई जा रही है। ग्राम दसोंदी के नन्ने सिंह और हेमराज सिंह ने बताया, सैकड़ों साल पहले मां बलखंडन पहाड़ी के पास पेड़ के नीचे प्रकट हुई थीं। मां बलखंडन के चमत्कार से श्रद्धालु चैत्र नवरात्र पर्व पर उघारे होकर दंड भरते हुए माता के दरबार में जाते हैं। यह परंपरा काफी पुरानी है, जो आज भी मां के दरबार में अनवरत जारी है।