यदि किसी कंपनी का टेंडर होता है, तो वह स्वयं के वाहन लगाते हैं या फिर किसी से किरायानामा का अनुबंध कर उन वाहनों का संचालन करते हैं, लेकिन जो विधायक निधि से वाहन तेंदूखेड़ा स्वास्थ केंद्र को दिया गया था, वह कैसे जननी वाहन में अटैच हो गया।
दमोह के तेंदूखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र में कोरोनाकाल की दूसरी लहर में मरीजों की सुविधा के लिए विधायक निधि से एक एंबुलेंस उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन पिछले एक वर्ष से यह वाहन गायब है और मरीज वाहन के अभाव में परेशान हो रहे हैं। दरअसल कोविड संक्रमण के दौरान लोगों क़ो स्वास्थ्य केंद्र से कोविड सेंटर भेजने या जबलपुर रेफर करने के लिए तेंदूखेड़ा स्वास्थ केंद्र में कोई वाहन नहीं था। इसलिए जनप्रतिनिधियों की मांग पर जबेरा विधायक धर्मेंद्र सिंह लोधी ने विधायक निधि से एक वाहन तेंदूखेड़ा स्वास्थ्य केंद्र को दिया था। वह वाहन कुछ महीनों तक तो तेंदूखेड़ा में रहा उसकी सुविधाओं का लाभ मरीजों व घायलों को मिला, लेकिन पिछले एक वर्ष से वह वाहन अचानक लापता हो गया है। जानकारी लेने पर पता चला कि वह वाहन क्षतिग्रस्त हो गया है और जबलपुर में पड़ा हुआ है। अब यह कोई बताने तैयार नहीं कि आखिर वाहन क्षतिग्रस्त कैसे हुआ और यदि क्षतिग्रस्त हुआ है तो आज तक सुधारकर वापस क्यों नहीं आया। हालांकि कुछ लोग दबी जुबान में यह भी कह रहे हैं कि विधायक निधि से मिले वाहन को एक जननी एक्सप्रेस में अधिकृत कर दिया था, उसी दौरान यह घटना हो गई थी। लोगों का कहना है कि विधायक निधि से मिला वाहन जननी में कैसे पहुंच गया। जननी में जो वाहन अधिकृत होते हैं उन्हें शासन एक एजेंसी के माध्यम से अनुबंध पर लगाती है। विधायक निधि से जो वाहन मिला था वह नगर और क्षेत्र के उन लोगों के उपयोगी था, जो निजी वाहनों का किराया नहीं दे सकते थे।
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जिस समय तेंदूखेड़ा स्वास्थ केंद्र में विधायक ने अपनी निधि से वाहन दिया था। उस समय ये समस्या आ रही थी कि यदि किसी व्यक्ति को जबलपुर या दमोह रेफर किया जाता था, तो निजी वाहन का किराया दो हजार रुपये तक लगता था। इसलिए जनप्रतिनिधियों कि मांग पर विधायक धर्मेंद्र सिंह ने यह वाहन दिया था। वाहन के आने के बाद रोगी कल्याण समिति कि निगरानी में वाहन था और यदि किसी जरूरत मंद को वाहन कि जरूरत पड़ती है, तो वह डीजल और चालक खर्च कि रसीद कटवाकर अपने मरीज को उपचार के लिए दमोह, जबलपुर ले जा सकता था, लेकिन ये वाहन पिछले एक वर्ष से गायब है। जिसकी कोई पूरी जानकारी नहीं दे रहा। स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी कह रहे हैं, कि वाहन जननी वाहन में बदल गया था और चार से पांच माह पहले उसका एक्सीडेंट हो गया था, जो जबलपुर गया है वहां से वापस ही नहीं आया।
यदि किसी कंपनी का टेंडर होता है, तो वह स्वयं के वाहन लगाते हैं या फिर किसी से किरायानामा का अनुबंध कर उन वाहनों का संचालन करते हैं, लेकिन जो विधायक निधि से वाहन तेंदूखेड़ा स्वास्थ केंद्र को दिया गया था, वह कैसे जननी वाहन में अटैच हो गया। शासन उस वाहन कि सेवाओं के बाद उस कंपनी क़ो भुगतान कर रही थी वह भुगतान कौन ले रहा था। यह सवाल सभी के जहन में है। स्वास्थ्यकर्मी भी यही कह रहे हैं कि जिस का टेंडर हुआ था उसका पत्र आया था, उसके बाद वाहन भोपाल भेजा गया था। उसके आगे क्या प्रकिया हुई इसकी किसी क़ो जानकारी नही है। पूरे मामले में तेंदूखेड़ा सीबीएमओ आरआर बागरी से बात करनी चाही तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। स्वास्थ्य केंद्र में जब भी इस प्रकार के मामले उजागर होते हैं तो सीबीएमओ के द्वारा फोन नहीं उठाया जाता जिससे वह अपनी जवाबदेही से भी बचने लगते हैं।