इंदौर के एक प्रोफेसर का अपनी छात्रा के साथ प्रेम प्रसंग शुरू हुआ और उससे शारीरिक संबंध भी बनाए। उसने शादी करने का भी वादा किया। बाद में यह कहते हुए मुकर गया कि उसके परिजन शादी के लिए तैयार नहीं हैं।
16 साल की प्रेम कहानी समाप्त होने के बाद अदालत ने इंदौर के प्रमुख कॉलेज के इस चिकित्सक को कठघरे में अब खड़ा किया है।
इस सप्ताह बैंगलोर हाई कोर्ट ने प्रोफेसर को निर्देश दिया कि वो महिला को 22 लाख रुपये का मुआवजा दें।
ऐसे शुरू हुई प्रेम कहानी
डॉक्टर केवी नंजुंदा स्वामी और लड़की की मुलाकात 1998 में सुलिया (कर्नाटक) के डेंटल कॉलेज में हुई थी। उस समय स्वामी वहां पर लेक्चरर के पद पर थे और वह प्रथम वर्ष की छात्रा थी।
पांच साल तक प्रेम प्रसंग चलने के बाद 2002 में दोनों ने शादी करने का निर्णय लिया, लेकिन स्वामी के परिजन छात्रा के अन्य जाति के होने के कारण तैयार नहीं हुए।
लड़की ने प्रोफेसर के विरूद्ध धोखाधड़ी, रेप व जातीय अत्याचार करने का मुकदमा दायर किया। इस दौरान दोनों ने किसी और से शादी कर ली।
फिलहाल लड़की बैंगलोर के डेंटल कॉलेज में लेक्चरर और डॉक्टर स्वामी इंदौर के श्री अरबिंदो इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस में कार्यरत हैं। हाईकोर्ट की सलाह पर दोनों ने इस मामले में समझौता कर लिया और स्वामी मुआवजा देने को भी तैयार हो गए।
रेप के आरोपों से मुक्त किया
हाल ही निचली अदालत ने स्वामी को रेप के आरोपों से मुक्त करते हुए इसे दो वयस्कों के बीच सहमति से किया गया कृत्य करार दिया। लेकिन शादी करने के वादे से मुकरने के लिए के आरोप में एक साल के कारावास की सजा सुनाई।
स्वामी ने मामले में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। प्रेम प्रसंग को लेकर दोनों की एक राय थी, लेकिन वादा खिलाफी विवाद की वजह थी। स्वामी के वकील ने कोर्ट के सामने लड़की की तरफ से लिखे गए पत्र पेश किए, जिसमें उसने स्वामी से अन्य से शादी करने की बात कही थी।
कुछ पत्र ऐसे भी थे जिसमें लड़की ने उनसे शादी करने की इच्छा जताई थी। मामले में लड़की के परिजन उनको मैसूर के सबरजिस्ट्रार कार्यालय में शादी करने का दबाव बनाया था। हालांकि स्वामी के परिजन इसके खिलाफ थे।
स्वामी के वकील ने दलील दी कि दोनों ने दूसरे व्यक्तियों से शादी कर ली है तो वादा खिलाफी का मामला नहीं बनता। मामले में दोनों ने आपसी सहमति से रिश्ते बनाए थे।