मध्यप्रदेश सरकार के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि मध्यप्रदेश में प्रति 75,000 लोगों के लिए केवल एक वेंटिलेटर है और प्रति 47,000 लोगों के लिए मात्र एक आईसीयू बेड उपलब्ध है। हालांकि, राज्य सरकार के लिए यह संतोष की बात है कि इस महामारी से लड़ने के लिए कारगर मानी जा रही हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वीन की वर्तमान में प्रति व्यक्ति करीब 30 गोलियां उपलब्ध हैं। असलियत में यह दवा मलेरिया के उपचार में काम आती है, लेकिन फिलहाल कोरोना वायरस संक्रमण के इलाज में दुनिभर में इसका प्रयोग हो रहा है।
इस महामारी ने प्रदेश के जबलपुर में 20 मार्च को दस्तक दी थी और मात्र 21 दिन में इस बीमारी ने प्रदेश के 20 जिलों को अपनी चपेट में ले लिया है। प्रदेश में इंदौर में सर्वाधिक 235 कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं, जबकि भोपाल में 112 मरीज संक्रमित पाए गए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार साढ़े सात करोड़ से अधिक आबादी वाले मध्यप्रदेश में सरकारी एवं निजी अस्पतालों को मिलाकर मार्च 2020 तक कुल 993 वेंटिलेटर और गहन चिकित्सा विभाग (आईसीयू) के 1,598 आईसीयू बेड उपलब्ध हैं।
प्रदेश की साढ़े सात करोड़ से अधिक आबादी के साथ इन वेंटिलेटरों और आईसीयू बेडों की तुलना करने पर पता चलता है कि करीब प्रति 75,000 लोगों के लिए एक वेंटिलेटर है और प्रति 47,000 लोगों के लिए एक आईसीयू बेड है। लेकिन, इन वेंटिलेटरों एवं आईसीयू बेडों में से अधिकांश पर पहले से ही अन्य बीमारियों से जूझ रहे अति गंभीर मरीज हैं, जिससे मुसीबत और बढ़ सकती है। आंकड़ों के अनुसार प्रदेश के अस्पतालों में कुल 29,914 बेड हैं, जिनमें से 9,492 आइसोलेशन (पृथक) वार्ड हैं।