हमका अइसा वइसा न समझो भैया, हम बड़े काम की चीज- बॉलीवुड गीत वाली यह कॉलरटोन पिछले कई दिनों से मध्य प्रदेश में विजयराघौगढ़ से कांग्रेसी विधायक संजय पाठक के मोबाइल पर सुनाई दे रही थी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं ने तो उनकी इस कॉलर टोन को अनदेखा कर दिया, लेकिन भारतीय जनता पार्टी ने इसे गंभीरता से लिया है। संजय पाठक का भाजपा प्रवेश पक्का हो गया है। सोमवार को सुबह सवा नौ बजे वह मुख्यमंत्री निवास पर प्रेस कांफ्रेंस करने जा रहे हैं।
संजय पाठक ने अमर उजाला से बातचीत में इस संभावना से इनकार किया है कि खजुराहो से चुनाव लड़ रहे नागेंद्र सिंह के स्थान पर उन्हें मौका मिल सकता है। संजय पाठक ने कहा कि यह संभावना एक लाख फीसदी गलत है। नागेंद्र सिंह उनके लिए वरिष्ठ और सम्माननीय नेता हैं। वह खजुराहो चुनाव में नागेंद्र सिंह के पक्ष में चुनाव प्रचार करेंगे और उनकी जीत सुनिश्चित करने का प्रयास करेंगे। भाजपा हलकों में भी माना जा रहा है कि संजय पाठक के आने से नागेंद्र सिंह की स्थिति मजबूत हुई है।
संजय पाठक इस बात का भी खंडन करते हैं कि उन्होंने खजुराहो से टिकट मांगा था। लेकिन कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि संजय पाठक खजुराहो से राजा पटेरिया को टिकट दिलाए जाने के खिलाफ थे। राजा पटेरिया को कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी महासचिव मोहन प्रकाश का करीबी माना जाता है। कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि राजा पटेरिया को टिकट दिलाने में मोहन प्रकाश और सत्यव्रत चतुर्वेदी की भूमिका रही है।
संजय पाठक ने कांग्रेस के प्रमुख क्षत्रपों के विरुद्ध आवाज बुलंद करते हुए कहा था कि पांच-छह बड़े नेता मिलकर प्रदेश में कांग्रेस का बेड़ा गर्क कर रहे हैं। दरअसल संजय पाठक को पिछले विधानसभा चुनाव में भी घेरने के पूरे प्रयास किए गए थे। जहां दिग्विजय सिंह ने संजय पाठक के विरोधी फीरोज अहमद को उतारा था वहीं महाकौशल में कमलनाथ भी उन्हें बढ़ते नहीं देखना चाहते थे।
कांग्रेस के आंतरिक सूत्रों का कहना है कि संजय पाठक के आर्थिक संसाधनों का इस्तेमाल करने के लिए कांग्रेस के पदाधिकारियों ने उन्हें महत्वाकांक्षी बना दिया, लेकिन वे महत्वाकांक्षाएं पूरी करने में विफल रहे। कांग्रेस की मौजूदा स्थिति को देखते हुए कई पीढ़ियों से कांग्रेसी संजय पाठक जैसे नेताओं का जाना कोई आश्चर्य की बात नहीं।