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Bharat Jodo Nyay Yatra: कांग्रेस से दूर होते वोट बैंक सहरिया आदिवासियों पर राहुल गांधी की नजर, करेंगे संवाद

Sat, 02 Mar 2024 06:19 PM IST
शबाहत हुसैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी

सार

MP News: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की नजर अपनी पार्टी के पुराने वोट बैंक सहरिया आदिवासियों पर है। मध्यप्रदेश में सहरिया आदिवासी ग्वालियर-चंबल संभाग में बड़ी संख्या में हैं। इसी बात को ध्यान में रखते हुए राहुल गांधी ने अपनी भारत जोड़ो न्याय यात्रा के दौरान शिवपुरी जिले के मुड़खेडा में इन सहरिया आदिवासियों से संवाद का कार्यक्रम रखा है। 
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सहरिया आदिवासियों पर राहुल गांधी की नजर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सहरिया आदिवासियों से संवाद के दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी इस समाज की परेशानियां और जीवनचर्या को लेकर के बातचीत करेंगे। राहुल गांधी लोकसभा चुनाव से ठीक पहले 3 मार्च को भारत जोड़ो न्याय यात्रा के जरिए शिवपुरी जिले के मुड़खेडा गांव पहुंचेंगे। मुड़खेडा गांव आगरा मुंबई राष्ट्रीय राजमार्ग फोरलेन पर ग्वालियर और शिवपुरी के मध्य में स्थित है। इस इलाके के आसपास बड़ी संख्या में सहरिया आदिवासी रहते हैं।

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सहरिया आदिवासी ग्वालियर-चंबल संभाग की कई सीटों को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। बड़ी संख्या में इस आदिवासी समाज के वोट हैं। सहरिया आदिवासियों को पहले कांग्रेस का वोट बैंक माना जाता था, लेकिन 20 साल से मध्य प्रदेश में कांग्रेस की सरकार नहीं है और धीरे-धीरे सहरिया आदिवासी समाज कांग्रेस से दूर होता चला गया। अब अपने पुराने वोट बैंक पर कांग्रेस की नजर है और इसी क्रम में राहुल गांधी की इस क्षेत्र में भारत जोड़ो न्याय यात्रा के जरिए अपने पुराने वोट बैंक को पार्टी से जोड़ने की पहल कर रहे हैं। 

जंगल में जमीनें छिनने से नाराज हैं आदिवासी
राहुल गांधी अपनी न्याय यात्रा के दौरान सहरिया आदिवासियों के जीवन में आ रही परेशानियों को लेकर के उनसे बातचीत करेंगे। इस संवाद के दौरान यह सहरिया आदिवासी अपनी समस्याएं कांग्रेस नेता राहुल गांधी के सामने रखेंगे। वैसे शिवपुरी जिले में सहरिया आदिवासियों की बात की जाए तो जल, जंगल, जमीन के मुद्दे पर यह सहरिया आदिवासी सरकार से नाराज हैं। बीते कुछ सालों में इन सहरिया आदिवासियों ने स्थानीय स्तर पर यह मुद्दे उठाकर धरना प्रदर्शन और ज्ञापन देकर अपनी बात रखी भी है, लेकिन इसकी कोई सुनवाई नहीं हुई। खासकर वन अधिकार अधिनियम कानून के तहत वन क्षेत्र में रहने वाले आदिवासियों को सालों से वन भूमि पर काबिज होने पर पट्टे दिए जाने का प्रावधान है, लेकिन वन अधिकार अधिनियम के तहत सहरिया आदिवासियों को यह पट्टे नहीं दिए गए। 

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