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एमपी: शिविर में शिकायतों के समाधान में लापरवाही पर गिरी गाज, निलंबन से वेतन वृद्धि रोकने तक की कार्रवाई

Sat, 08 Aug 2026 03:00 PM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा

सार

मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत आयोजित जिला स्तरीय समाधान कार्यक्रम में शिकायतों के निराकरण में लापरवाही सामने आने पर प्रशासन ने सख्त कार्रवाई की। पात्र हितग्राही को अनुग्रह सहायता में देरी, राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त न करने और गलत प्रतिवेदन देने जैसे मामलों में अधिकारियों पर निलंबन, वेतन वृद्धि रोकने और नोटिस की कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
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मुख्यमंत्री बैठक लेते हुए
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विस्तार
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मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत शुक्रवार को आयोजित जिला स्तरीय समाधान कार्यक्रम में शिकायतों के निराकरण के साथ प्रशासनिक जवाबदेही भी तय की गई। सुनवाई के दौरान सामने आए मामलों में कहीं पात्र हितग्राही को वर्षों तक सहायता नहीं मिली तो कहीं सरकारी आदेश जारी होने के बावजूद महीनों तक राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं किया गया।
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एक मामले में शिकायत का समाधान किए बिना उसे पोर्टल पर बंद कर दिया गया, जबकि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि से जुड़े मामले में गलत प्रतिवेदन दिए जाने की बात सामने आई। इन मामलों की समीक्षा के बाद प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए निलंबन के निर्देश दिए। वहीं कुछ अधिकारियों की वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने और कारण बताओ नोटिस जारी करने के आदेश हुए। कार्रवाई के साथ पात्र हितग्राहियों को तत्काल राहत देने के निर्देश भी दिए गए।
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चार साल बाद मिली अनुग्रह सहायता राशि
 मानद्युती वर्मा ने शिकायत की थी कि उनके दिवंगत पति संतोष वर्मा की वर्ष 2022 में मृत्यु के बाद मिलने वाली अनुग्रह सहायता राशि का भुगतान करीब चार साल बाद किया गया। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर जनपद पंचायत चौरई के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तरुण राहांगडाले और तत्कालीन श्रम पदाधिकारी धम्मदीप भगत की एक-एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश दिए गए। प्रशासन ने माना कि पात्र परिवार को समय पर सहायता नहीं मिलना गंभीर प्रशासनिक शिथिलता का मामला है।

आदेश के बाद भी आठ महीने तक नहीं सुधरा रिकॉर्ड
राजस्व अभिलेख में नाम दुरुस्ती से जुड़े मामले में गोविंद नायक ने शिकायत की थी। जांच में सामने आया कि एसडीएम चौरई ने 10 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी कर दिया था, लेकिन करीब आठ महीने तक आदेश का पालन नहीं हुआ। मामले में एक और गंभीर बात सामने आई। शिकायत का वास्तविक निराकरण किए बिना उसे पोर्टल पर फोर्स क्लोज कर दिया गया। इसके बाद एसडीएम चौरई प्रभात मिश्रा को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए। तहसीलदार चौरई उमराज वालरे और संबंधित हल्का पटवारी की एक-एक वार्षिक वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश भी दिए गए।

पोर्टल की गलती से दस महीने तक नहीं मिला प्रसूति योजना का लाभ
सीमा तुमराम ने प्रसूति सहायता योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत की थी। जांच में पता चला कि प्रथम प्रसव के दौरान अनमोल पोर्टल पर डुप्लीकेट पंजीयन हो गया था। इसके कारण दूसरे प्रसव के समय महिला को गलत तरीके से अपात्र दर्शा दिया गया। इस तकनीकी और प्रशासनिक चूक के चलते हितग्राही करीब दस महीने तक योजना के लाभ से वंचित रही। समीक्षा में जिले में इस तरह की बड़ी संख्या में शिकायतें लंबित मिलने पर मामले को गंभीरता से लिया गया। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेश गुन्नाडे को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए गए।

पीएम किसान में पंजीयन ही नहीं, फिर भी दे दिया गलत प्रतिवेदन
मीरा बंजारा ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत की थी। जांच में पता चला कि करीब एक वर्ष तक किसान का पीएम किसान पोर्टल पर पंजीयन ही नहीं किया गया था। इसके बावजूद संबंधित हल्का पटवारी ने सीएम हेल्पलाइन पर गलत प्रतिवेदन प्रस्तुत कर दिया। मामले में हल्का पटवारी सिद्धांत साहू और परासिया तहसीलदार सुनैयना ब्रह्मे को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने के निर्देश दिए गए। साथ ही हितग्राही को करीब एक वर्ष तक योजना के लाभ से वंचित रहने के कारण मुख्यमंत्री स्वेच्छानुदान से आर्थिक सहायता तत्काल उपलब्ध कराने के आदेश दिए गए।

मत्स्य योजना की अनुदान राशि भी तत्काल देने के निर्देश
भावना डहेरिया ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत वर्ष 2022-23 में स्वीकृत आरएएस परियोजना की अनुदान राशि नहीं मिलने की शिकायत की थी। जांच में सामने आया कि जिला अनुमोदन समिति से परियोजना स्वीकृत होने के बावजूद अनुदान राशि लंबित थी। इस पर सहायक संचालक मत्स्य विभाग को राशि का तत्काल भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

शिकायत बंद करना आसान, लेकिन अब जवाबदेही भी तय होगी
समाधान कार्यक्रम में सामने आए मामलों से एक बात स्पष्ट हुई कि सरकारी पोर्टल पर शिकायत को बंद कर देना ही उसका निराकरण नहीं माना जाएगा। जब तक शिकायतकर्ता को वास्तविक राहत नहीं मिलती, तब तक जिम्मेदारी तय की जा सकती है।
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चार साल तक सहायता राशि अटकना, आदेश के बाद भी आठ महीने तक रिकॉर्ड में सुधार नहीं होना, शिकायत को बिना समाधान फोर्स क्लोज करना और गलत प्रतिवेदन देना ऐसे मामले रहे, जिन पर प्रशासन ने सीधे कार्रवाई की। मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के तहत हुई इन कार्रवाइयों से अधिकारियों और कर्मचारियों को साफ संदेश दिया गया है कि योजनाओं का लाभ समय पर नहीं पहुंचाने, आदेशों की अनदेखी करने या शिकायतों के निराकरण में लापरवाही बरतने पर अब जिम्मेदारी तय होगी।
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