छिंदवाड़ा में आदिवासी भूमि विवाद से जुड़े कथित 15 करोड़ रुपये की अड़ीबाजी और धमकी के मामले में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के पूर्व जिला अध्यक्ष देवरावेन भलावी समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के न्यायालय ने आदेश दिए हैं। कुंडीपुरा पुलिस को जांच कर रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
छिंदवाड़ा के गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) के पूर्व जिला अध्यक्ष देवरावेन भलावी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। आदिवासी वर्ग की भूमि की खरीदी-बिक्री से जुड़े विवाद में कथित रूप से 15 करोड़ रुपये की अड़ीबाजी, धमकी और दबाव बनाने के आरोपों पर न्यायालय ने देवरावेन भलावी समेत चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। न्यायालय के निर्देश पर कुंडीपुरा पुलिस को प्रकरण दर्ज कर जांच शुरू करने और अपनी प्रतिवेदन (रिपोर्ट) न्यायालय में प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।
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अधिवक्ता रफीक अंसारी के अनुसार, न्यायालय ने फरियादी अल्फाज शाह उर्फ गोलू निवासी माल्हनवाड़ा और समीर खान की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश पारित किया। मामले में देवरावेन भलावी, आजाद कुरैशी निवासी बिजौरी, मोहिद खान निवासी गुलाबरा और मुबीन शाह निवासी माल्हनवाड़ा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 308(2), 318(2), 319(2), 351(3) तथा सहपठित धारा 61 के तहत प्रकरण दर्ज करने के निर्देश दिए गए हैं।
क्या है मामला
याचिका के अनुसार, माल्हनवाड़ा क्षेत्र में स्थित लगभग 16 एकड़ आदिवासी भूमि को फरियादी अल्फाज शाह ने कलेक्टर की अनुमति के बाद खरीदा था। आरोप है कि भूमि खरीदी के बाद आरोपियों ने 15 करोड़ रुपये की मांग की और स्वयं को लोकायुक्त का अधिकारी बताकर दबाव बनाया। साथ ही मांग पूरी नहीं होने पर गोंडवाना गणतंत्र पार्टी के बैनर तले धरना-प्रदर्शन करने की धमकी भी दी गई।
यह मामला उस समय भी चर्चा में आया था, जब अल्फाज शाह और समीर खान ने पत्रकार वार्ता कर पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया था। इसके बाद आरोपित पक्ष ने भी प्रेस वार्ता कर अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए अपना पक्ष रखा था। अब इसी मामले में न्यायालय ने पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विधिवत जांच करने के आदेश दिए हैं।
पहले भी हुई थी संगठनात्मक कार्रवाई
मामले के तूल पकड़ने के बाद गोंडवाना गणतंत्र पार्टी ने देवरावेन भलावी को जिला अध्यक्ष पद से हटा दिया था। इसके साथ ही उन्हें पार्टी से निष्कासित भी कर दिया गया था। अब न्यायालय के आदेश के बाद इस मामले ने एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा तेज कर दी है।