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भोपाल: होटल निर्माण के नाम पर 1.46 करोड़ हड़पे, फर्जी बिल जमा कर साझेदारों से वसूली रकम, तीन पर FIR दर्ज

Thu, 17 Sep 2026 12:08 PM IST
भोपाल ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

भोपाल में होटल तैयार करने के लिए दिए गए करोड़ों के ठेके में बिलों और जमीनी काम के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। निर्माण कंपनी ने करीब 1.96 करोड़ रुपए के काम के बिल लगाए, लेकिन जांच में कई कार्य अधूरे या गायब मिले। मामले में तीन लोगों पर FIR हुई है।
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अपराध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भोपाल में होटल निर्माण के नाम पर साझेदारों से 1.46 करोड़ रुपए लेने और इसके बाद कथित तौर पर फर्जी बिलों के आधार पर रकम हड़पने का मामला सामने आया है। गोविंदपुरा पुलिस ने उत्तरप्रदेश की द शुभम होटल्स प्राइवेट लिमिटेड के मालिक शुभम यादव, डायरेक्टर गरिमा यादव और अर्चित सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी सहित संबंधित धाराओं में प्रकरण दर्ज किया है।
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आरोप है कि कंपनी ने होटल निर्माण से जुड़े अलग-अलग कार्यों के नाम पर करीब 1.96 करोड़ रुपए के बिल पेश किए। इन बिलों के आधार पर साझेदारों ने कंपनी को ऑनलाइन माध्यम से करीब 1.46 करोड़ रुपए का भुगतान किया। बाद में निर्माण कार्य बंद हो गया। साझेदारों ने मौके का निरीक्षण कराया तो बिलों में दर्शाए गए कई काम या तो हुए ही नहीं थे या अधूरे पाए गए।

3.75 करोड़ में होटल विकसित करने का हुआ था अनुबंध
गोविंदपुरा पुलिस के अनुसार रचना नगर निवासी मनोज नागर, जाटखेड़ी निवासी तरुण प्रताप सिंह बघेल और उनके साझेदारों का शाहपुरा के शक्तिनगर में पहले से बिल्डिंग स्ट्रक्चर बना हुआ था। सितंबर 2024 में इस भवन को होटल के रूप में विकसित करने के लिए द शुभम होटल्स प्राइवेट लिमिटेड से अनुबंध किया गया था। अनुबंध के तहत होटल निर्माण की कुल लागत करीब 3.75 करोड़ रुपए तय की गई थी। दोनों पक्षों को निर्माण पर होने वाला खर्च 50-50 प्रतिशत वहन करना था। होटल का निर्माण अगस्त 2025 तक पूरा किया जाना था।
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फर्नीचर से लेकर लिफ्ट तक के बिल लगाए
शिकायत के मुताबिक होटल कंपनी ने फर्नीचर, लिफ्ट, फॉल्स सीलिंग, फायर फाइटिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिकल और सिविल वर्क सहित विभिन्न कार्यों के नाम पर करीब 1.96 करोड़ रुपए के बिल प्रस्तुत किए। इन बिलों के आधार पर साझेदारों ने कंपनी को करीब 1.46 करोड़ रुपए का भुगतान किया। शिकायतकर्ताओं के अनुसार बाद में निर्माण कार्य बंद हो गया और शुभम यादव के वहां से चले जाने के बाद उन्होंने निर्माण स्थल का निरीक्षण कराया। इस दौरान बिलों में दर्शाए गए कई काम मौके पर नहीं मिले।

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बिल लगाया लेकिन मौके पर नहीं मिला फर्नीचर
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कंपनी ने करीब 89 लाख रुपए के फर्नीचर का बिल प्रस्तुत किया था, लेकिन मौके पर फर्नीचर मौजूद नहीं था। इसी तरह करीब 15.16 लाख रुपए की लिफ्ट और 16.78 लाख रुपए की फॉल्स सीलिंग व फायर फाइटिंग सिस्टम से जुड़े काम भी अधूरे पाए जाने का दावा किया गया है। इसके अलावा इलेक्ट्रिकल और सिविल वर्क में भी बिल में दर्शाई गई राशि की तुलना में काफी कम काम होने का आरोप लगाया गया है।

दस्तावेजों के आधार पर जांच शुरू
शिकायतकर्ताओं ने निर्माण कार्य के मूल्यांकन से संबंधित स्ट्रक्चरल इंजीनियर की रिपोर्ट, बैंक स्टेटमेंट और अन्य दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर गोविंदपुरा पुलिस ने शुभम यादव, गरिमा यादव और अर्चित सिंह के खिलाफ धोखाधड़ी का प्रकरण दर्ज किया है।
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पुलिस अब कंपनी की ओर से प्रस्तुत किए गए बिल, साझेदारों द्वारा किए गए भुगतान और मौके पर हुए वास्तविक निर्माण कार्य का मिलान कर रही है। साथ ही पुलिस यह भी जांच रही है कि बिलों में दर्शाई गई रकम और मौके पर हुए काम के बीच कितना अंतर है तथा इस पूरे मामले में किसकी क्या भूमिका रही है।
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