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MP के छिंदवाड़ा का पातालेश्वर धाम: 250 वर्ष पुरानी नागा संत की तपोस्थली, महाशिवरात्रि पर उमड़ती है आस्था

Sun, 15 Feb 2026 09:15 AM IST
छिंदवाड़ा ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छिंदवाड़ा

सार

Pataleshwar Dham: छिंदवाड़ा स्थित पातालेश्वर धाम का इतिहास करीब 250 वर्ष पुराना बताया जाता है। नागा संत गंगागिरी बाबा से जुड़ी जनश्रुतियों के कारण यह स्थल प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि और श्रावण मास में यहां हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
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श्री पातालेश्वर धाम प्राचीन शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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छिंदवाड़ा क्षेत्र में स्थित पातालेश्वर धाम श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का प्रमुख केंद्र माना जाता है। बताया जाता है कि इस धाम का इतिहास ढाई सौ साल से भी अधिक पुराना है। प्राचीन समय में यह इलाका घने और बीहड़ जंगलों से घिरा हुआ था और नागा साधु-संतों की साधना स्थली के रूप में विख्यात रहा है।

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स्वप्न में शिव दर्शन और शिवलिंग की स्थापना
स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार करीब 250 वर्ष पूर्व गोस्वामी संप्रदाय के नागा संत गंगागिरी बाबा ने यहां धूनी रमाई थी। एक रात उन्हें स्वप्न में भगवान शिव के दर्शन हुए और इस स्थान पर अपनी उपस्थिति का संकेत मिला। अगले दिन संत द्वारा बताए गए स्थान पर खुदाई कराई गई, जहां से भूरे रंग का शिवलिंग प्रकट हुआ। इसे चमत्कार मानते हुए वहां एक छोटी मढ़िया बनाकर शिवलिंग की स्थापना की गई। समय के साथ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ती गई और मंदिर का निर्माण तथा जीर्णोद्धार होता रहा।

पढ़ें- Maihar News: गोलामाठ स्थित 1600 वर्ष प्राचीन शिव मंदिर में उमड़ती है आस्था, महाशिवरात्रि पर लगता है भव्य मेला
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प्राचीन जलकुंड और अद्भुत प्राकृतिक दृश्य
मंदिर परिसर में एक प्राचीन जलकुंड स्थित है, जिसका धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व बताया जाता है। श्रद्धालु इस कुंड के जल को पवित्र मानते हैं। परिसर में एक विशाल पीपल का वृक्ष भी है, जिसमें नीम और बड़ के पेड़ जुड़े हुए हैं। यह प्राकृतिक स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।
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महाशिवरात्रि और श्रावण में विशेष आयोजन
महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं। पूरे श्रावण मास में विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसके अतिरिक्त वर्ष भर विभिन्न धार्मिक आयोजनों का क्रम जारी रहता है, जिससे यह धाम क्षेत्र की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

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