फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MP News: फिर शुरू हुआ 'चिता आंदोलन', केन-बेतवा परियोजना के विरोध में प्रदर्शन तेज, प्रशासन पर लगे गंभीर आरोप

Sat, 04 Jul 2026 04:17 PM IST
छतरपुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर

सार

MP News: मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना समेत अन्य परियोजनाओं से प्रभावित लोगों ने 'न्याय दो या मार दो' के नारे के साथ चिता आंदोलन दोबारा शुरू कर दिया है। आंदोलनकारियों ने प्रशासन पर झूठे आश्वासन, फर्जी मुकदमे, गैरकानूनी बेदखली और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। वहीं, प्रशासन का पक्ष इस खबर में शामिल नहीं है।
 
विज्ञापन
केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ आदिवासियों का उग्र आंदोलन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

मध्य प्रदेश के छतरपुर और पन्ना जिलों में संचालित केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगाय मध्यम, रूंझ, नैगुवा सिंचाई और एनटीपीसी परियोजनाओं के विरोध में स्थगित 'चिता आंदोलन' एक बार फिर शुरू हो गया है। आंदोलनकारी 'न्याय दो या मार दो' के नारे के साथ केन-बेतवा प्रभावित कुपी गांव के पास केन की सहायक बराना नदी के किनारे धरना दे रहे हैं। इस चिता आंदोलन का नेतृत्व आदिवासी महिलाएं कर रही हैं।
विज्ञापन


'परियोजना अन्याय और अनियमितताओं का प्रतीक बन गई'
सामाजिक कार्यकर्ता एवं आंदोलन के नेता अमित भटनागर ने प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन के भ्रष्ट और तानाशाहीपूर्ण रवैये के कारण लगभग 50 हजार लोग बेघर हो गए हैं। उनके अनुसार, लोग अपने जल, जंगल, जमीन, आजीविका और सांस्कृतिक विरासत से बेदखल हो चुके हैं।

पर्यावरणीय नुकसान पर भी जताई चिंता
अमित भटनागर ने दावा किया कि केन-बेतवा लिंक परियोजना के कारण 46 लाख पेड़ों, पन्ना टाइगर रिजर्व और केन नदी को अपूरणीय पर्यावरणीय क्षति पहुंचेगी। उन्होंने इसे पर्यावरण और जैव विविधता के लिए गंभीर खतरा बताया।
विज्ञापन


'वादे पूरे नहीं हुए, उल्टा कार्रवाई की गई'
आंदोलन के नेताओं दिव्य अहिरवार और लक्ष्मी आदिवासी ने आरोप लगाया कि अप्रैल में हुए चिता आंदोलन के बाद प्रशासन ने उनकी मांगें पूरी करने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक भी वादा पूरा नहीं किया गया। उनका आरोप है कि लोगों में भय पैदा करने के लिए फर्जी मुकदमे दर्ज किए जा रहे हैं, गैरकानूनी बेदखली की जा रही है, बिजली कनेक्शन काटे जा रहे हैं और स्कूल तक तोड़े जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आंदोलन दबाने के लिए पुलिस और प्रशासन द्वारा उत्पीड़न किया जा रहा है।

यह भी पढ़ें: हनीमून पर गई लुटेरी दुल्हन गिरफ्तार, इंस्टाग्राम ने खोला ठिकाना, फिल्मी चुनौती पड़ गई भारी
विज्ञापन


'न्याय नहीं दे सकते तो इच्छा मृत्यु दे दें'
बड़ी बहू आदिवासी सहित आंदोलन में शामिल आदिवासी महिलाओं ने कहा कि इस बार वे सरकार के किसी भी आश्वासन पर भरोसा नहीं करेंगी। उनका कहना है कि यदि सरकार उन्हें न्याय नहीं दे सकती तो उन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति दे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें