7 वर्षीय रूबी चऊदा और 35 वर्षीय दिनेश साहू रस्मों रिवाज के साथ गठबंधन में बंध गए।
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छतरपुर में एक विवाह चर्चा का केंद्र बना रहा। 27 वर्षीय रूबी चऊदा और 35 वर्षीय दिनेश साहू रस्मों रिवाज के साथ गठबंधन में बंध गए। दोनों ने बांदा के गायत्री मंदिर में विवाह किया। खास बात यह है कि वर-वधू देख नहीं सकते। समाज के लोग न केवल विवाह के साक्षी बने बल्कि उपहार देकर उनके मंगलमय जीवन के लिए शुभकामनाएं भी देते दिखे।
बता दें कि रूबी के माता-पिता और भाई भी नहीं हैं। केवल वे तीन बहनें जिसमें उसकी बड़ी बहन की शादी पूर्व में हो चुकी है। एक छोटी बहन भी है। जबकि दिनेश के भी कोई भी भाई-बहन नहीं हैं। नेत्रहीन दिनेश की शिक्षा दिल्ली में हुई है। वह दिल्ली में ही सर्विस करता है। जब कि रूबी की शिक्षा जबलपुर और ट्रेनिंग चित्रकूट में हुई। रूबी की ट्रेनिंग पूरी होने के पश्चात वहां के अधीक्षक ने रूबी के रिश्तेदारों को दिनेश साहू के बारे में अवगत कराया और साथ ही चित्रकूट में होने वाले दिव्यांग जनों के सम्मेलन में सम्मिलित होने की बात की।
वहां उन्हें एक दूसरे से मिलाया गया तत्पश्चात रूबी के रिश्तेदार अरुण रश्मि खैरा छतरपुर एवं अन्य परिजनों और गहोई समाज छतरपुर ने भी उक्त संदर्भ में पूर्ण सहमति और सहयोग प्रदान कर दोनों नेत्रहीनों का विवाह संपूर्ण रीति रिवाज के साथ मां गायत्री मंदिर बांदा में संपन्न कराया गया। गहोई वैश्य समाज छतरपुर ने उपस्थित होकर नव दंपत्ति को भगवान लड्डू गोपाल सहित अन्य सामग्री भी प्रदान की और शुभकामनायें और बधाई प्रेषित कीं।
दिनेश साहू ने बताया कि नेत्रहीन होने के पश्चात भी मेरे लिए बहुत से संबंध आए लेकिन मेरा कहना था मैं शादी करूंगा तो वह भी नेत्रहीन लड़की से, क्योंकि ऐसा ना होने से कभी-कभी आपसी संबंधों में दरारें आ जाती हैं। मैं नेत्रहीन हूं तो कोई बात नहीं कि हम देख नहीं सकते तो क्या हमें पता नहीं कि बाहर की दुनिया कैसी है लोग तो एक दूसरे को देख कर जलते हैं और एक दूसरे को नीचा दिखाने की कोशिश करते हैं ऐसा नहीं होना चाहिए।