छतरपुर रेलवे स्टेशन पर मुसाफिर हर बारिश के बाद परेशान नजर आते हैं। हर जगह टपकता पानी और बैठने के लिए भी सूखी जगह नहीं मिल पाती। समस्या इतनी पुरानी हो गई कि बारिश होते ही स्टेशन के बाहर छाते बेचने वाले दिखने लगते हैं।
छतरपुर रेलवे स्टेशन के बाहर यूं तो छाते-चटाई की दुकान लगना सामान्य लगता है। पर इन सामानों की जरूरत स्टेशन पर ज्यादा लगने लगी है। शेड होने के बावजूद पानी टपकना और हर तरफ गीला होने की वजह से बैठने की जगह न होना ही इन सामान के बिकने की वजह बन रहा है।
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छतरपुर रेलवे स्टेशन को हाल ही में करोड़ों रुपये से बनाया गया था। इसे बड़े ही भव्य स्वरूप में बनाया तो गया है पर यह भव्यता सिर्फ नाम की है काम का कुछ भी नहीं। यात्रियों के लिए यहां सैकड़ों सीटर की स्टील चेयर, पिलर के चारों ओर ग्रेनाइट के चबूतरे और देखने में बेहतर टीन सेड यात्रियों के बैठने के लिए बने हैं। बावजूद इसके यह लोगों के किसी काम के नहीं।
भारी बारिश तो छोड़ो ये हल्की-फुल्की बारिश और रिम-झिम फुहार में भी भीग जाते हैं। स्टेशन के टीनशेड पर हर तरफ पानी टपकता है। जिससे फर्श, कुर्सियां, चबूतरे भीग जाते हैं। लोगों को बैठने के लिए सूखी जगह नहीं मिलती, जहां उन्हें खुद पानी साफ कर और पोंछा लगाकर बैठना होता है। जिसके चलते लोग अपने-अपने घरों से पोंछा, चटाई, छाता लेकर आते हैं। और ट्रेन आने पर ही उन्हें सुकून नसीब होता है। वर्षों से चले आ रहे इन हालातों को लोगों ने नियति मानकर इसे अपने व्यवहार में शामिल कर लिया है। जिसके चलते लोग यहां छाता चटाई लेकर आते हैं। और अब तो स्टेशन के बाहर छाता, चटाई भी जरूरी सामान की तरह बिकने लगे हैं।