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व्यापम की 'व्यापकता' से डरी CBI, खड़े किए हाथ

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मध्यप्रदेश के कुख्यात व्यापमं घोटाले की जांच में लगी सीबीआई इसकी व्यापकता को देखकर अभी से हाथ खड़ी करती दिख रही है। देश की शीर्ष जांच एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट में दिए हलफनामे में बताया कि इसकी 'गुंजाइश और गहराई' को देखते हुए उसके पास मैन पावर की कमी है। मतलब साफ है कि व्यापम की व्यापकता को देखकर सीबीआई भी हाथ खींचती दिख रही है।
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अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के अनुसार व्यापम घोटाले के याचिकाकर्ता डा. आनंद राय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका पर पक्ष रखते हुए सीबीआई ने कहा कि डीमैट (मध्यप्रदेश डेंटल मैडिकल एडमिशन टेस्ट) तो व्यापम घोटाले से भी कई गुणा व्यापक दिख रहा है।

सीबीआई ने विनम्रतापूर्वक अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पहले से ही चल रही जांचों के बाद अब इसकी जांच कर पाना या जारी रख पाना मुश्किल दिख रहा है, क्योंकि एजेंसी पर इतने संसाधन खासकर मानव संसाधन नहीं हैं।
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सीबीआई ने कहा हमारे पास मैनपावर की कमी

सीबीआई ने कहा कि कोई भी जांच सामान्यतः इंस्पेक्टर से अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रैंक के अधिकारी द्वारा की जाती है, जिनकी कुल क्षमता ही 1264 है। एजेंसी के अनुसार कुल 348 पोस्ट, जिनमें अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक की 23, डिप्टी एसपी की 42 और इंस्पेक्टर के कुल 283 पद खाली हैं।

बता दें सर्वोच्‍च अदालत ने याचिकाकर्ता द्वारा डीमैट घोटाले की जांच के संबंध में दायर की गई याचिका पर सीबीआई की प्रतिक्रिया मांगी थी। याचिकाकर्ता डा. राय और आशीष चतुर्वेदी ने मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की ‌थी क्योंकि पूर्व में मध्यप्रदेश की एसटीएफ इसकी जांच करने से हाथ खड़े कर चुकी थी।

वहीं सीबीआई ने कोर्ट से उनकी मांग स्वीकार न करने का अनुरोध किया। एजेंसी के अनुसार पूर्व में डीमैट घोटाले में किसी भी सरकारी अधिकारी के खिलाफ कोई आरोप नहीं था, ऐसे में इन मामलों को सीबीआई को नहीं सौंपा जाना चाहिए।
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क्षमता से अधिक मामलों की जांच कर रही एजेंसी

एजेंसी ने बताया व्यापम घोटाले की जांच के अलावा सीबीआई पहले से ही विभिन्न राज्यों में चिटफंड घोटाले के एक हजार मामलों की जांच कर रही है। जबकि इसका खुद का लक्ष्य अधिकतम 848 मुकदमों का है।

ऐसे में इतने मानव संसाधन के साथ इससे अधिक मामले उसके लिए असहनीय और संभालने में लगभग असंभव हो जाएंगे। एजेंसी के एसपी प्रदीप कुमार की ओर से दायर जवाब में अपना पक्ष रखा गया।

वहीं, डीमैट घोटाले के संबंध में बात करने पर आनंद दाय कहते हैं, घोटाले में शामिल रहे स्कोरर और सोल्वर निजी मेडिकल कालेजों से सेटिंग कर परीक्षा में बैठते थे और नंबर आने पर ऐन वक्त पर सीट छोड़ देते थे जिसके बाद कालेज अपने स्तर पर उन एडमिशन को भरते थे।

यही कारण है कि मध्य प्रदेश एडमिशन एंड फीस रेगुलेटरी कमेटी ने छह प्राइवेट कालेजों पर साल 2015 में 721 सीटों को ऐसे ही भरने के आरोप में करोड़ का जुर्माना लगाया है।
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