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IAS रंजना चौधरी ने व्यापम घोटाला रोकने की पुरजोर कोशिश की थी: सीबीआई

Thu, 30 Nov 2017 06:25 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला
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मध्यप्रदेश व्यापम की इमारत
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मध्यप्रदेश के बहुचर्चित और कुख्यात व्यापम घोटाला मामले में सीबीआई की ताजा चार्जशीट के मुताबिक आईएएस रंजना चौधरी ने इस घोटाले को रोकने की पुरजोर कोशिश की थी। रंजना चौधरी वही आईएएस अधिकारी हैं जिनसे व्यापम घोटाले की जांच के शुरुआती दिनों में पूछताछ हुई थी। 
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रंजना चौधरी 2011 से 2013 के बीच व्यापम की चेयरमैन थीं। इसके बाद दो साल पहले ही उन्हें हैदराबाद में केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण में जज नियुक्त किया गया है। 

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक सीबीआई के आरोपपत्र के सारांश से पता चलता है कि 'इंजन-बोगी व्यवस्था' के जरिये नकल कराने के लिए व्यापम के अधिकारियों ने पीएमटी 2012 के दौरान कई 'कपटपूर्ण निर्णय' लिए। इनमें से एक था अन्य शहरों में होनेवाली परीक्षाओं का इंदौर और भोपाल में होनेवाली परीक्षाओं के साथ विलय कराना। इसके कारण परीक्षा केन्द्रों में भीड़ बढ़ गई जिससे रैकेटियर को पैसा देने वाले छात्रों को बड़े पैमाने पर नकल करने का मौका मिला। 
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सूत्रों के मुताबिक व्यापम घोटाले की जांच सीबीआई की कमान में आने से पहले 2 मई 2015 को विशेष कार्य बल (एसटीएफ) ने व्यापम कार्यालय के अंदर चौधरी से पूछताछ की थी। एसटीएफ जांच की निगरानी कर रही एसआईटी ने चौधरी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की थी और मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने एसटीएफ को इसका पालन नहीं करने के लिए फटकार लगाई थी। 

चौधरी उस तीन सदस्यीय टीम की भी प्रमुख थीं जिन्होंने मेडिकल प्री-पीजी 2012 परीक्षा के प्रश्नपत्रों को अंतिम रूप दिया था। टीम के अन्य दो सदस्यों में आईपीएस अधिकारी एम. नटराजन और रिटायर्ड आईएफएस अधिकारी आर. पी. शुक्ला शामिल थे। 

इससे पहले सीबीआई ने 23 नवंबर को व्यापम के चार पूर्व अधिकारियों समेत 592 आरोपियों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट पेश किया था। एक अनुमान के मुताबिक व्यापम के पीएमटी-2012 घोटाले में 2000 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि का लेनदेन हुआ था और 5000 से ज्यादा छात्र-छात्राएं इससे प्रभावित हुए थे। 
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