कुएं से पानी भरते हुए गांव की महिलाएं, किशोर लड़के और लड़कियां।
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जानें क्या थी 45 साल पुरानी ये कहानी?
यह पूरी दास्तान है नरयावली विधानसभा के अंतर्गत आने वाले इमलिया गांव की। इस आदिवासी बहुल गांव में आज भी करीब 300 लोग पानी की बूंद-बूंद के लिए तरस रहे हैं। जब सिंह आदिवासी बताते हैं कि पांच हजार रुपये की रिश्वत नहीं थी, इसलिए सिस्टम ने 45 वर्ष पूर्व दुत्कार लगाई थी। उस वक्त गांव में पानी का भीषण संकट था।
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बुजुर्ग ने गांव में कुआं खुदवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटे, लेकिन तब उनसे पांच हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई। पेशे से बेहद गरीब मजदूर हूं इतने पैसे नहीं थे, लिहाजा प्रशासन ने हाथ खड़े कर दिए। हालात इतने बदतर थे कि परिवार को कभी नाली तक का गंदा पानी पीना पड़ता था, तो कभी प्यासे ही सो जाना पड़ता था।
कुएं से पानी लाते ग्रामीण।
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जब पत्नी का हुआ अपमान, तो सिर पर सवार हुआ था जुनून
एक दिन पानी की किल्लत से परेशान होकर अजब सिंह की पत्नी सदा रानी गांव से दूर अपने जेठ के घर पानी भरने गईं। वहां पानी देने से मना करते हुए उन्हें अपमानित करके भगा दिया गया। उनको इस बात का पता चला, तो उनके आत्मसम्मान को गहरी ठेस लगी। उन्होंने ठान लिया कि अब वो किसी के आगे हाथ नहीं फैलाएंगे।
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कुदाल-फावड़ा उठाया और अपने घर के पास ही जमीन खोदनी शुरू कर दी। वह दिनभर मजदूरी करते ताकि बच्चों का पेट भर सके व सुबह-शाम का बचा हुआ सारा वक्त कुआं खोदने में लगा देते। करीब दो साल की हाड़-तोड़ मेहनत के बाद अजब सिंह ने अकेले ही 50 फीट गहरा कुआं खोदकर पानी निकाल दिया।
ये है बुजुर्ग अजब सिंह के द्वारा खोदा गया कुआं।
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बड़ा दिल: पूरे गांव के लिए खोल दिए कुएं के रास्ते
अजब सिंह की पत्नी सदा रानी बताती हैं कि वह समय बेहद कठिन था, लेकिन आज उन्हें अपने पति पर गर्व है। उनका दिल इतना बड़ा है कि उन्होंने कभी भी गांव के किसी भी व्यक्ति को अपने कुएं से पानी भरने से नहीं रोका। आज स्थिति यह है कि गांव का सरकारी कुआं गर्मियों में सूख जाता है और सरकार की 'नल-जल योजना' की टंकी सफेद हाथी बनकर खड़ी है।
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ऐसे में पूरा गांव आज भी अजब सिंह के इसी कुएं के भरोसे है। हालांकि, अब इसका पानी मटमैला हो चुका है, जिससे बच्चियों को स्कूल छोड़ पानी ढोना पड़ रहा है, लेकिन ग्रामीणों के पास कोई और विकल्प नहीं है।
अब 71 वर्ष की आयु में खुद बना रहे अपना घर।
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