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MP News: सेवा भाव के चलते एमपी के इस BMO की दानवीर कर्ण से हो रही तुलना, जानिए कौन हैं डॉ. जेपी खरे

Thu, 09 Feb 2023 04:26 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, दमोह

सार

दमोह जिले के तेंदुखेड़ा ब्लॉक के रिटायर्ड बीएमओ डॉ. जेपी खरे ने आजीवन लोगों की सेवा की और अब अपनी करोड़ों की संपत्ति अपना अस्पताल और देह दान कर लोगों के लिए प्रेरणा की मिसाल पेश कर रहे हैं।
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रिटायर्ड बीएमओ डॉ. जेपी खरे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कर्ण को दुनिया का सबसे बड़ा दानवीर कहा जाता है, लेकिन जन्मभूमि के प्रति अपना समर्पण रखने वाले एक दानवीर मप्र के दमोह जिले में भी हैं। उन्होंने अपनी जीवन भर की कमाई से जुटाई करोड़ों की संपत्ति के साथ ही अपना शरीर भी दान कर दिया, ताकि छात्र मेडिकल की पढ़ाई कर सकें। ये बुजुर्ग चिकित्सक आज पूरे क्षेत्र के लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत हैं।
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दमोह जिले के तेंदूखेड़ा ब्लॉक के सेवानिवृत्त बीएमओ डॉ. जेपी खरे की आयु 83 वर्ष हो गई है। वे तेंदूखेड़ा से सात किलोमीटर दूर धनगोर गांव के रहने वाले हैं। उन्होंने गांव में प्रारंभिक शिक्षा हासिल करने तेंदूखेड़ा में उच्च शिक्षा हासिल की। उसके बाद वे डॉक्टर बने। शासकीय सेवा के दौरान उन्होंने कई जिलों में सेवाएं दीं और सेवानिवृत्ति के पूर्व उनका स्थानांतरण हो गया, लेकिन वे नई जगह ज्वाइन करने नहीं गए और शासकीय नौकरी से इस्तीफा देकर वीआरएस ले लिया। 

लोक स्वास्थ्य केंद्र शुरू किया
डॉ. खरे को अपने क्षेत्र के लोगों की चिंता थी इसलिए तेंदूखेड़ा में उन्होंने लोक स्वास्थ्य केंद्र का संचालन शुरू कर दिया। जहां कई वर्षों तक उन्होंने मरीजों का इलाज मात्र 10 रुपये में किया। कुछ समय बाद फीस 50 रुपये की। वे फीस केवल इसलिए लिया करते थे, ताकि कर्मचारियों को वेतन दे सकें। इतना हीं नहीं जबलपुर और नागपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों को भी डॉ. खरे तेंदूखेड़ा बुलाते हैं, ताकि क्षेत्र के लोग अपना इलाज यहीं करा सकें और उन्हें भटकना न पड़े। सप्ताह में दो दिन आंख और हार्ट के विशेषज्ञ आते हैं। ये भी मामूली शुल्क में सेवाएं देते हैं। क्षेत्र के लोगों की सेवा के इरादे से डॉ. खरे यहीं बस गए हैं। 
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नि: शुल्क करते हैं इलाज
कई वर्षों से डॉक्टर खरे तेंदुखेड़ा नगर और क्षेत्र के सैकड़ों परिवारों का नि:शुल्क इलाज करते आ रहे हैं। आज भी उनके अस्पताल में प्रतिदिन आने वाले मरीजों में 50 प्रतिशत मरीजों का नि:शुल्क उपचार होता है। गरीब और बेसहारा लोगों से 50 रुपये भी नहीं लिए जाते। 

समाज सेवा में बिताया जीवन
डॉक्टर खरे ने अपना जीवन समाज सेवा के लिए सौंप दिया है। पांच वर्ष पूर्व देहदान का संकल्प भी ले लिया। जिस अस्पताल में वे बैठकर वर्तमान समय में मरीजों का उपचार कर रहे हैं उसका मालिकाना हक छोड़ने की प्रक्रिया भी उन्होंने शुरू कर दी है। डॉ. जेपी खरे ने बताया कि 2017 में उन्होंने अपनी देह दान करने की प्रक्रिया जबलपुर मेडिकल कॉलेज में पूरी कर दी है और अब वह तेंदूखेड़ा के लोक स्वास्थ्य केंद्र के नाम से संचालित अस्पताल, जो कि पांच बैड के लिए पंजीकृत है, उसका मालिकाना हक भी छोड़ेंगे। वे एक ट्रस्ट बना रहे हैं। ट्रस्ट बनते ही अस्पताल ट्रस्ट को दे दिया जाएगा। डॉक्टर जेपी खरे का कहना है कि उनकी कुछ जमीन है और भोपाल में दो बेटे भी बड़े पदों पर हैं, उन्होंने परिवार की सहमति से अपनी पूरी संपत्ति, जमीन जायदाद ट्रस्ट के नाम करने का फैसला किया है। धनगोर में उनकी पुश्तैनी जमीन पर गौ सेवा केंद्र खोला है। इसमें करीब 1500 मवेशी और 10 कर्मचारी हैं। डॉ. खरे की 40 हजार रुपये मासिक पेंशन से इन कर्मचारियों को वेतन दिया जाता है।

डॉ. खरे से बड़ा दानी नहीं : विधायक लोधी
जबेरा के विधायक धर्मेंद्र सिंह लोधी ने पूर्व मंत्री दशरथ सिंह और पूर्व सांसद चंद्रभान सिंह की मौजूदगी में डॉक्टर खरे का बुधवार को सम्मान किया। विधायक ने कहा कि आज के समय में कोई व्यक्ति एक रुपये भी नहीं छोड़ता और हमारे क्षेत्र के रिटायर्ड बीएमओ ने अपनी करोड़ों की संपति के साथ अपना शरीर ही दान कर दिया, वाकई उनसे बड़ा दानी कोई नहीं हो सकता। 
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