व्यावसायिक परीक्षा मंडल (व्यापमं) भर्ती घोटाले में संघ और भाजपा नेताओं के नाम आने के मुद्दे पर भाजपा नेता रघुनंदन शर्मा ने प्रतिक्रिया दी है।
उन्होंने कहा, "पार्टी को ऐसी व्यवस्था (मैकेनिज्म) बनानी चाहिए जो फिल्टर का काम कर सके और पार्टी में ऐसे लोग नहीं आ सकें जो केवल सत्ता का फायदा उठाने के लिए जुड़ते हैं।"
बता दें कि रघुनंदन शर्मा भाजपा के वो नेता हैं, जो व्यापमं घोटाले में गिरफ्तार पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा के बचाव में सामने आए थे।
'पार्टी-संघ में फिल्टरेशन की जरूरत'
रघुनंदन शर्मा का कहना है, "कई लोग भाजपा से इसलिए जुड़ जाते हैं कि सत्ता का फायदा उठा सकें, उनका संघ या भाजपा की विचारधारा से कोई संबंध नहीं रहता।"
उनके मुताबिक, "अब पार्टी में कुशाभाऊ ठाकरे और प्यारेलाल खंडेलवाल जैसे नेता नहीं हैं, जो ऐसी अवांछित चीजों पर निगाह रख सकें। वे संघ या पार्टी में फिल्टरेशन का काम करते थे।"
उल्लेखनीय है कि विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की जांच में कई लोगों के बयानों में संघ नेताओं के नाम सामने आए हैं। जिसका मध्य प्रदेश पुलिस ने बाद में खंडन किया। लेकिन पुलिस ने यह कहा है कि पंकज त्रिवेदी के कंप्यूटर की हार्डडिस्क से कोई सबूत नहीं मिले, जिसमें संघ नेताओं के नाम आते हों।
कई मुद्दों पर जताया असंतोष
बीजेपी नेता रघुनंदन शर्मा का कहना है, "आज ऐसा दौर है, जिसमें कई परिक्रमा करने वाले आगे बढ़ जाते हैं। लेकिन इससे पराक्रम करने वाले की हार नहीं होती। सत्य की जीत होती है। अंत में पराक्रम करने वाले ही जीतते हैं।"
राज्यसभा के सदस्य रहे रघुनंदन शर्मा को लोकसभा चुनावों में टिकट नहीं मिला था। वह मंदसौर से चुनाव लड़ने के इच्छुक थे।
शर्मा ने कहा, "यह सच है कि मैं मंदसौर से चुनाव लड़ना चाहता था। पार्टी नेतृत्व ने मुझे कहा था कि आपको चुनाव लड़ना है। बाद में मुझे टिकट नहीं दिया। पार्टी का निर्णय मैंने स्वीकार किया, लेकिन अपनी असहमति मैंने पार्टी नेतृत्व को बता दी। मुझे दुख तो है।"
व्यापमं घोटाले का दंश झेल रही शिवराज सरकार के बारे में शर्मा का कहना है, "सरकार अच्छा काम कर रही है। मध्य प्रदेश में भाजपा आगे ही बढ़ने वाली है, पीछे हटने वाली नहीं है।" उनका कहना है, "अब केंद्र और राज्यों में अभूतपूर्व प्रदर्शन ही होगा।"