मध्य प्रदेश की सरकारी स्कूलों की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। जहां शिक्षकों की कमी से छात्र-छात्राओं का कोर्स पूरा नहीं हो पा रहा है। वहीं इस वर्ष प्रदेश के सरकारी स्कूलों में प्रवेश की स्थिति काफी खराब है। प्रदेश करीब साढ़े पांच हजार स्कूलों में एक भी छात्र ने एडमिशन नहीं लिया है। यह स्थिति शिक्षा विभाग के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। इधर स्कूल शिक्षा विभाग अब सरकारी स्कूलों में प्रवेश बढ़ाने के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, ग्राम पंचायत सचिव और ग्राम पंचायत में रोजगार सहायकों को टारगेट देने के निर्देश दिए हैं। स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने कहा है सभी कर्मचारी स्कूलों में 100 प्रतिशत प्रवेश के लिए घर-घर तक जाएं।
शिवनी जिले के 425 स्कूलों में नहीं हुए प्रवेश
मध्य प्रदेश में जिन साढ़े पांच हजार सरकारी स्कूलों में इस वर्ष प्रवेश नहीं हुए उनमें से सिवनी जिला सबसे ऊपर है। यहां 425 सरकारी स्कूलों में जीरो प्रवेश हुए हैं। जबकि दूसरे नंबर पर सतना जिला है यहां 303 स्कूलों में जीरो एडमिशन हुए हैं। तीसरे नंबर पर नरसिंहपुर जिला है जहां 299 स्कूलों में एक भी एडमिशन नहीं हुए। इसी प्रकार खरगोन में 287 स्कूल, बैतूल में 265 स्कूल, सागर में 258 स्कूल, विदिशा में 258 स्कूल, रायसेन में 207 स्कूल, मंदसौर में 193 स्कूल, देवास में 181 स्कूलों में एक भी प्रवेश इस वर्ष नहीं हुए हैं। इस प्रकार प्रदेश के 5,501 ऐसे स्कूल हैं जहां इस वर्ष जीरो प्रवेश रहा है।
इसलिए नहीं हो रहे प्रवेश
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की लगातार कमी और व्यवस्थाओं की कमी के चलते इस वर्ष अभिभावकों ने अपने बच्चों के प्रवेश में रुचि नहीं दिखाई है। प्रदेश की ज्यादातर स्कूल अतिथि शिक्षकों के सहारे चलाए जा रहे हैं। यहां शिक्षकों की कमी के चलते अतिथि शिक्षकों की भर्ती की जाती है। इस बार अतिथि शिक्षकों के लिए नियम बदलने से अभी तक भर्ती प्रक्रिया पूरी नहीं की जा सकी है। यही वजह है कि छात्र-छात्राओं की पढ़ाई अभी तक शुरू नहीं हो पाई है। वहीं प्रवेश में कमी की दूसरी वजह सरकारी स्कूलों में समुचित व्यवस्थाएं जैसे टॉयलेट, पानी की व्यवस्था नहीं होना भी माना जा रहा है।
शिक्षा मंत्री ने प्रवेश के लिए दिया जोर
स्कूल शिक्षा मंत्री राव उदय प्रताप सिंह ने निर्देश दिए हैं कि सरकारी स्कूलों में कक्षा पहली में शत-प्रतिशत बच्चों का प्रवेश हो, यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सरकारी स्कूलों में मिलने वाली सुविधाएं जैसे नि:शुल्क गणवेश, पाठ्य-पुस्तकें और मध्यान्ह भोजन की जानकारी शिक्षकों, आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, सचिव और रोजगार सहायक के माध्यम से बच्चों के अभिभावकों के घर-घर तक पहुंचने के लिए भी कहा है।