यूनिसेफ इंडिया ने टीकाकरण और बाल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर पूरे भारत के रेडियो प्रोफेशनल्स को जागरूक करने के उद्देश्य से दो दिन की वर्कशॉप का आयोजन किया, जिसका समापन शुक्रवार को हुआ। रेडियो4चाइल्ड प्लेटफॉर्म के तहत 21-22 दिसंबर तक आयोजित इस वर्कशॉप में बाल संरक्षण और टीकाकरण से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों को संबोधित करने में फ्रंटलाइन चैंपियन के रूप में रेडियो प्रोफेशनल्स की भूमिका को अहम माना गया है। कार्यशाला में राजस्थान, हरियाणा, चंडीगढ़, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के निजी एफएम, ऑल इंडिया रेडियो और सामुदायिक रेडियो के 40 से ज़्यादा रेडियो प्रोफेशनल्स ने भाग लिया।
राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, मध्य प्रदेश के निदेशक टीकाकरण, डॉ. संतोष शुक्ला ने कहा कि 'रेडियो, अपनी व्यापक पहुंच के साथ, टीकाकरण और बाल संरक्षण के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रसारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह समुदायों और आवश्यक स्वास्थ्य कार्यक्रमों के बीच एक पुल के रूप में कार्य करता है। हमारे सामूहिक प्रयासों का उद्देश्य रेडियो प्रोफेशनल्स को बच्चों की आवाज़ को बढ़ाने और बाल संरक्षण और सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों को मजबूत करने के लिए सशक्त बनाना है।'
वहीं, यूनिसेफ इंडिया के इम्यूनाइजेशन स्पेशलिस्ट डॉ. मैनाक चटर्जी ने नियमित टीकाकरण कवरेज बढ़ाने में भारत की महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला। सत्र के दौरान, मध्य प्रदेश के महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त निदेशक, सुरेश तोमर ने कहा, 'अक्सर शारीरिक या घरेलू हिंसा के कुछ रूपों को बिल्कुल भी हिंसा नहीं माना जाता है।
हालांकि ऐसी हिंसाएं बच्चे पर प्रतिकूल प्रभाव डालती हैं। कुछ माता-पिता ने अपने बच्चों को अपने सपनों को पूरा करने का साधन बना लिया है, जिससे बच्चों पर अनावश्यक तनाव पड़ता है, जो मनोवैज्ञानिक हिंसा का भी एक रूप है। इसे रोकने की जरूरत है।'
इस दौरान शर्मिला रे, बाल संरक्षण विशेषज्ञ, यूनिसेफ और अद्वैता मराठे, बाल संरक्षण अधिकारी, यूनिसेफ मध्य प्रदेश ने बच्चों के खिलाफ हिंसा के विभिन्न पहलुओं के बारे में बात की। उन्होंने बच्चों के खिलाफ हिंसा को कलंकित करने के लिए समर्थन तैयार करने और पीड़ित को शर्मसार करने वाली संस्कृति की रोकथाम की दिशा में काम करने का आह्वान किया।
रेडियो प्रोफेशनल्स ने यूनिसेफ टीम, अनिल गुलाटी और सोनिया सरकार द्वारा संकल्पित समूह कार्य में भाग लिया, जिससे दो विषयों पर रेडियो उत्पादों का निर्माण संभव हो सका। प्रतिभागियों ने सोशल मीडिया पर रील्स और स्टोरीज के माध्यम से भी बाल संरक्षण और टीकाकरण संदेशों को लोगों तक पहुंचाया।