मध्य प्रदेश से मानसून की विदाई के बाद भी बादलों की आवाजाही थम नहीं रही है। अक्टूबर में एक बार फिर मौसम के अलग-अलग रंग देखने को मिल रहे हैं। कहीं बारिश हो रही है तो कहीं रात के तापमान में गिरावट से ठंडक बढ़ने लगी है। उत्तर-पश्चिमी मध्य प्रदेश में सक्रिय दो चक्रवाती परिसंचरण के असर से शनिवार को 21 जिलों में आंधी और बारिश की संभावना है। अगले चार दिन तक प्रदेश के कई संभागों में मौसम का मिजाज बदला रहेगा। मौसम केंद्र भोपाल के अनुसार, शनिवार को ग्वालियर, उज्जैन, नीमच, मंदसौर, आगर-मालवा, राजगढ़, रतलाम, झाबुआ, धार, आलीराजपुर, गुना, अशोकनगर, शिवपुरी, श्योपुर, मुरैना, भिंड, दतिया, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर और पन्ना में बारिश हो सकती है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के भी आसार हैं।
चार दिन तक इन संभागों में दिखेगा असर
मौसम विभाग के मुताबिक, उत्तर-पश्चिमी हिस्से में सक्रिय दो चक्रवाती परिसंचरण के कारण ग्वालियर, चंबल और उज्जैन संभाग के साथ सागर, नर्मदापुरम, रीवा और जबलपुर संभाग में भी मौसम प्रभावित हो सकता है। 18 और 19 अक्टूबर को नीमच, मंदसौर, श्योपुर, शिवपुरी, गुना, अशोकनगर, निवाड़ी, टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सीधी, मऊगंज, सिंगरौली, सिवनी और बालाघाट में बारिश की संभावना है। 20 अक्टूबर से मौसम प्रणाली कमजोर पड़ने लगेगी। इसके बाद तेज बारिश की संभावना कम हो जाएगी।
मानसून लौटने के बाद भी क्यों बरस रहे बादल?
प्रदेश से तीन अक्टूबर को मानसून की विदाई हो चुकी है। इसके बावजूद सक्रिय मौसमी प्रणालियों के कारण बारिश का सिलसिला दोबारा शुरू हो गया है। पिछले कुछ दिनों से खासकर प्रदेश के उत्तरी और पूर्वी हिस्सों में इसका असर दिखाई दे रहा है। गुरुवार को श्योपुर, भिंड, मुरैना, नीमच और मंदसौर में बारिश दर्ज की गई थी। शुक्रवार को भी कई इलाकों में मौसम बदला रहा। मौसम विशेषज्ञ अरुण शर्मा के अनुसार, पिछले दस वर्षों के आंकड़ों में अक्टूबर के दौरान बारिश, गर्मी और ठंड तीनों का असर देखने को मिलता है। इस बार भी मौसम का यही मिला-जुला रूप सामने आ रहा है। अक्टूबर की शुरुआत में आसमान साफ होने के साथ धूप तेज होने लगी थी, जबकि रात में ठंडक महसूस की जा रही थी। अब दोबारा बारिश होने से दिन और रात के मौसम में अंतर बना हुआ है।
रात में बढ़ने लगी ठंडक
बारिश के बीच प्रदेश के कई शहरों में न्यूनतम तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। अमरकंटक में न्यूनतम तापमान 16.6 डिग्री, छिंदवाड़ा में 17.4 डिग्री, इंदौर में 17.6 डिग्री, कटनी के करौंदी में 18 डिग्री और बैतूल में 18.4 डिग्री दर्ज किया गया। इससे साफ है कि प्रदेश में बारिश के साथ रात की ठंडक भी धीरे-धीरे बढ़ रही है।
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इस बार सामान्य से 1.5 इंच कम बरसा मानसून
बारिश के मौजूदा दौर के बीच मानसून के सीजन का आंकड़ा भी अहम है। जून से सितंबर तक मध्य प्रदेश में कुल 908.4 मिलीमीटर यानी करीब 35.8 इंच बारिश दर्ज की गई। प्रदेश में सामान्य बारिश का आंकड़ा 949.5 मिलीमीटर यानी 37.3 इंच है। इस तरह पूरे सीजन में सामान्य से करीब 1.5 इंच कम बारिश हुई। कुल मिलाकर प्रदेश में सामान्य से चार प्रतिशत कम पानी गिरा। हालांकि, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश के आंकड़ों में अंतर रहा। पूर्वी हिस्से में सामान्य से चार प्रतिशत अधिक बारिश हुई, जबकि पश्चिमी हिस्से में 12 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। पूर्वी क्षेत्र के जबलपुर, रीवा, सागर और शहडोल संभाग में कुल आंकड़ा सामान्य से चार प्रतिशत अधिक रहा। इसके बावजूद बालाघाट, छिंदवाड़ा, दमोह, जबलपुर, नरसिंहपुर, पांढुर्णा, रीवा, सागर और सिवनी जैसे जिलों में सामान्य से पांच से 21 प्रतिशत तक कम बारिश दर्ज की गई। पश्चिमी मध्य प्रदेश के आलीराजपुर, अशोकनगर, बड़वानी, बैतूल, देवास, धार, हरदा, इंदौर, झाबुआ, खंडवा, मंदसौर, मुरैना, नर्मदापुरम, नीमच, रायसेन, रतलाम, सीहोर, शाजापुर, उज्जैन और विदिशा में सामान्य से नौ से 51 प्रतिशत तक कम बारिश हुई।
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25 जिलों में बारिश का कोटा पूरा, 30 में कमी
सीजन के आंकड़ों के अनुसार, भोपाल, राजगढ़, बुरहानपुर, खरगोन, कटनी, मंडला, डिंडौरी, ग्वालियर, गुना, दतिया, पन्ना, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, मैहर, आगर-मालवा, भिंड, श्योपुर, सिंगरौली, सीधी, सतना, मऊगंज, शहडोल, उमरिया और अनूपपुर में बारिश का कोटा पूरा हो गया। दूसरी ओर, 30 जिलों में बारिश सामान्य से कम रही। इनमें नरसिंहपुर, दमोह, बालाघाट, अशोकनगर, मुरैना, मंदसौर, खंडवा, बड़वानी, नीमच, जबलपुर, रीवा, सागर, देवास, सिवनी, सीहोर, शिवपुरी, रायसेन, छिंदवाड़ा, विदिशा, शाजापुर, पांढुर्णा, इंदौर, उज्जैन, बैतूल, हरदा, नर्मदापुरम, रतलाम, झाबुआ, धार और आलीराजपुर शामिल हैं।
जून में कम बारिश से पिछड़ गया था सीजन
इस साल मानसून के कुल आंकड़े में कमी की एक बड़ी वजह जून में कम बारिश होना रही। मौसम विभाग के अनुसार, जून में सामान्य से 14 प्रतिशत कम पानी गिरा था। जुलाई की शुरुआत में अच्छी बारिश से स्थिति में सुधार हुआ, लेकिन मानसून के दो बार ब्रेक लेने से कई दिनों तक बारिश नहीं हुई। सीजन के अंतिम सप्ताह में सक्रिय मजबूत मौसमी प्रणाली से बारिश जरूर हुई, लेकिन जून की कमी की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। जुलाई, अगस्त और सितंबर में बारिश का कोटा पूरा होने के बावजूद पूरे सीजन का आंकड़ा सामान्य से चार प्रतिशत नीचे रह गया।