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व्यापम केस में सुप्रीम कोर्ट सख्त: 320 पेज की शिकायत पर CBI और राज्य सरकार से मांगा जवाब, 16 अप्रैल को सुनवाई

Thu, 26 Mar 2026 05:32 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

व्यापम घोटाले को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने CBI और मध्य प्रदेश सरकार से 320 पेज की शिकायत पर अब तक की जांच का पूरा ब्यौरा मांगा है। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को तय की गई है।
 
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व्यापम की फाइल फिर खुलेगी, सुप्रीम कोर्ट पूर्व विधायक की याचिका पर सख्त - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश के सबसे बड़े भर्ती घोटाले की जांच फिर तेज हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर व्यापम से संबंधित मामले में कड़ा रुख अपनाया है। व्यापम घोटाले से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए CBI और मध्य प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पूर्व विधायक पारस सकलेचा की 320 पेज की शिकायत पर अब तक क्या जांच हुई और चार्जशीट में क्या स्थिति है, इसकी स्पष्ट जानकारी देने को कहा है। यह मामला पारस सकलेचा की उस याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने अपनी शिकायत पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर इंदौर हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने उनकी याचिका इस आधार पर खारिज कर दी थी कि वे सीधे प्रभावित पक्ष नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट की खंडपीठ (जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया) ने सीबीआई और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था, लेकिन समय पर जवाब नहीं मिलने पर कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए दोनों से हलफनामा पेश करने को कहा है।
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11 साल बाद भी शिकायत पर नहीं हुई कार्रवाई 
पारस सकलेचा ने 2014 में पीएमटी और अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर दस्तावेजों सहित शिकायत की थी।  सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद उन्होंने CBI को 320 पेज की विस्तृत शिकायत सौंपी। इस मामले में CBI और STF ने उनके बयान दर्ज किए, लेकिन आगे कोई ठोस कार्रवाई नहीं होने के आरोप हैं।
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हाई कोर्ट के बाद सुप्रीम कोर्ट में की अपील 
जांच एजेंसियों की ओर से कार्रवाई नहीं होने पर सकलेचा ने 2023 में इंदौर हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अप्रैल 2024 में याचिका खारिज हो गई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपील की। अब सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल 2026 को तय की गई है।

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मध्य प्रदेश का सबसे चर्चित घोटाला
बता दें, मध्य प्रदेश में व्यापम के माध्यम से भर्ती परीक्षाओं में घोटाले का खुलासा हुआ था। इसकी शुरुआत 2014 में पीएमटी परीक्षा में ‘मुन्ना भाई’ बैठाकर पास कराने के मामले से हुई थी, लेकिन धीरे-धीरे इसमें पुलिस, परिवहन समेत कई भर्ती परीक्षाओं में भी गड़बड़ी सामने आई। इस मामले की जांच STF से लेकर CBI को सौंपी गई थी। यह मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार के कार्यकाल का बड़ा घोटाला माना जाता है, जिसके बाद छवि सुधारने के लिए व्यापम का नाम तीन बार बदला गया। वर्तमान में इसका नाम मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल है।





 
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