अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति में बड़ा घोटाला सामने आया है। एक क्लर्क और दो चपरासियों के खिलाफ विभाग के अधिकारी ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कराया है। इस पूरे घोटाले में विभाग के कुछ अधिकारियों की भूमिका की भी जांच किए जाने की संभावना है। आरोपियों ने फर्जी आईडी और डबल पेमेंट के जरिए यह घोटाला किया है।
महालेखाकार (सीएजी) की ऑडिट में 53 लाख 32 हजार 166 रुपये का घोटाला सामने आया है। इसके बाद अनुसूचित जाति, जनजाति कार्य विभाग के सहायक आयुक्त अवनीश चतुर्वेदी ने कोहेफिजा थाने में शिकायत की थी। शिकायत जांच के बाद पुलिस ने एक क्लर्क और दो चपरासियों के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार कलेक्टर कार्यालय में अनुसूचित जाति/जनजाति विभाग में पदस्थ क्लर्क खड़क बहादुर सिंह और चपरासी विनोद मांझी व मनोज मालवीय ने पोस्ट मैट्रिक छात्रवृति में 22 लोगों की फर्जी आईडी बनाकर 28 विद्यार्थियों का दोहरा भुगतान करके 11 लाख 58 हजार 980 हड़प लिए। वहीं 6 ऐसे विद्यार्थियों के नाम पर 1 लाख 22 हजार 96 रुपये भुगतान किए जो अनुसूचित जाति/जनजाति के नहीं थे। इस तरह से आरोपियों ने 53 लाख 32 हजार 166 रुपये का घोटाला कर दिया। यह घोटाला लंबे समय से चल रहा था। 2017 से 2021 तक की ऑडिट में यह घोटाला सीएजी ने पकड़ा है। इसके बाद कलेक्टर ने जांच टीम गठित की थी। जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर ही कोहेफिजा थाने में शिकायत की गई थी। पुलिस ने धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर आरोपियों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किया है। हालांकि, गुरुवार को तीनों आरोपियों में से एक भी आरोपी थाने नहीं पहुंचा। इधर विभाग तीनों को गिरफ्तारी होते ही निलंबित करने की तैयारी कर रहा है।