मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि जनता की संतुष्टि ही सरकार का मुख्य ध्येय है। नागरिकों की समस्याओं का समय पर समाधान और योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन ही सच्चे अर्थों में सुशासन का प्रतीक है। मुख्यमंत्री शुक्रवार को समत्व भवन से समाधान ऑनलाइन कार्यक्रम में प्रदेश के 14 जिलों के प्रकरणों की सीधी सुनवाई कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने सभी कलेक्टर्स को निर्देश दिए कि वे अपनी दक्षता और प्रबंधन क्षमताओं को लगातार बढ़ाएं और जनप्रतिनिधियों से समन्वय कर योजनाओं की प्रभावी डिलीवरी सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि यदि कोई मामला समाधान ऑनलाइन में पहुंच रहा है, तो यह प्रशासन की संवेदनशीलता की परीक्षा है। ऐसे मामलों का समय पर निवारण और दोषियों पर कार्रवाई आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने सभी जिलों से कहा कि वे पराली जलाने से रोकने के लिए किसानों को जागरूक करें और पर्यावरण की रक्षा के लिए बेहतर उपाय अपनाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि शासन की योजनाओं का लाभ प्रत्येक पात्र नागरिक को समय पर और प्रभावी ढंग से मिले, यही राज्य सरकार की प्राथमिकता है।
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समाधान ऑनलाइन में हुए प्रमुख प्रकरणों का निपटान
कार्यक्रम में पांढुर्णा की कलावती हिंगवे की मनरेगा भुगतान संबंधी शिकायत पर दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई कर उन्हें भुगतान कराया गया। मुरैना के ब्रह्मलाल सिंह के नामांतरण मामले में तहसीलदार व पटवारी पर कार्रवाई हुई। उमरिया के दीपक कोरी की पेंशन में देरी पर जिम्मेदार कर्मचारियों की वेतनवृद्धि रोकी गई।
- नीमच के लालाराम भील को वनाधिकार हक के तहत 9.28 लाख रुपये का लाभ दिलाया गया। भिंड के छात्र दिनेश को छात्रवृत्ति मिलने में देरी पर संबंधित अधिकारी पर कार्रवाई की गई। बैतूल के किसान अनोखीलाल केसीसी नवीनीकरण में लापरवाही पर शाखा प्रबंधक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई।
- निवाड़ी के चेनू कुशवाहा को गलत खाते में गई आवास राशि वापस दिलाई गई। रायसेन में बीमा क्लेम का भुगतान सुनिश्चित किया गया। नर्मदापुरम में नल-जल योजना में देरी पर जांच कराई जा रही है। धार की सीमा दांगी को विवाह प्रमाणपत्र दिलवाया गया और दोषी सचिव पर अर्थदंड लगाया गया।
- शहडोल में अत्याचार निवारण अधिनियम व छात्रवृत्ति मामलों में भुगतान सुनिश्चित किया गया और दोषियों को दंडित किया गया। सतना जिले के दो मामलों में गेहूं उपार्जन की राशि व विवाह सहायता की राशि का भुगतान कर संबंधित कर्मचारियों पर विभागीय कार्रवाई की गई।