गुफा मंदिर से बरेला गांव को जोड़ने वाला रास्ता बंद होने का मामला मंगलवार को कलेक्टोरेट पहुंच गया। रास्ता खुलवाने की मांग को लेकर बरेला गांव की महिलाएं कलेक्टोरेट पहुंचीं और सीढ़ियों पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। महिलाओं ने आरोप लगाया कि रास्ता बंद होने से ग्रामीणों को रोजाना परेशानी उठानी पड़ रही है। सोमवार को एक महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद अस्पताल पहुंचाने में दिक्कत हुई और मंगलवार को उनकी अंतिम यात्रा निकालने में भी रास्ता बाधा बना। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं की सुरक्षाकर्मियों से बहस भी हुई। बाद में महिलाओं ने अपर जिला दंडाधिकारी सुमित पांडेय से मुलाकात कर अपनी समस्या रखी।
महिला को समय पर अस्पताल नहीं पहुंचा सके
बरेला निवासियों के मुताबिक, सोमवार को एक महिला घर के बाथरूम में गिर गई थीं। हादसे में उन्हें गंभीर चोट लगी। रास्ता बंद होने के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी। परिजन उन्हें ऑटो से अस्पताल ले जाने के लिए निकले, लेकिन रास्ते में ही महिला ने दम तोड़ दिया। ग्रामीणों का कहना है कि अगर रास्ता खुला होता तो महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था।
अंतिम यात्रा में भी रास्ता बना बाधा
मंगलवार सुबह महिला की अंतिम यात्रा निकाली गई। बंद रास्ते और खराब सड़क के कारण परिजनों और ग्रामीणों को काफी परेशानी हुई। इसके बाद ग्रामीणों का गुस्सा और बढ़ गया और बड़ी संख्या में महिलाएं कलेक्टोरेट पहुंच गईं।
तीन-चार साल से बंद है करीब 50 साल पुराना रास्ता
महिलाओं ने प्रशासन को बताया कि गुफा मंदिर के पास से बरेला की ओर जाने वाला रास्ता करीब 50 साल पुराना है। ग्रामीणों का आरोप है कि यह रास्ता पिछले तीन-चार वर्षों से गुफा मंदिर समिति की ओर से बंद कर दिया गया है।ग्रामीणों का कहना है कि पिछले वर्ष भी रास्ता खुलवाने के लिए प्रदर्शन किया गया था। उस समय प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया, लेकिन स्थायी समाधान नहीं हुआ।
मंदिर की जमीन पर गतिविधियां चल रहीं, गांव का रास्ता बंद
प्रदर्शनकारी महिलाओं ने आरोप लगाया कि मंदिर की जमीन पर व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं, लेकिन दूसरी ओर वर्षों पुराने सार्वजनिक रास्ते को ग्रामीणों के लिए बंद कर दिया गया है। उनका कहना है कि इस रास्ते का उपयोग आसपास के ग्रामीण आने-जाने और मंदिर में दर्शन के लिए करते हैं। उन्होने कहा कि रास्ते पर कई दशक पुराना गेट लगा हुआ है। उनका कहना है कि यदि गेट खुला होता तो महिला को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सकता था। उन्होंने मंदिर समिति से गेट खोलने की मांग की।
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एडीएम बोले- मामले में होगी कार्रवाई
महिलाओं ने अपर जिला दंडाधिकारी सुमित पांडेय के सामने रास्ता खोलने की मांग रखी। एडीएम ने उन्हें मामले में आवश्यक कार्रवाई का भरोसा दिया। हालांकि, प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि वे केवल आश्वासन नहीं चाहतीं, बल्कि रास्ते की समस्या का स्थायी समाधान चाहती हैं। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया कि जब तक वर्षों पुराना रास्ता दोबारा नहीं खोला जाता, तब तक उनकी परेशानी दूर नहीं होगी।