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एमपी: कोचिंग सेंटरों पर नए नियम लागू! फीस, कोर्स और टीचर्स की जानकारी देना जरूरी, हर ब्रांच का अलग रजिस्ट्रेशन

Sun, 25 Oct 2026 10:38 AM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश में कोचिंग संस्थानों पर नियंत्रण और विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए नए नियमों का प्रारूप जारी किया गया है। इसके तहत पंजीकरण, हर शाखा का अलग रजिस्ट्रेशन, फीस-कोर्स और शिक्षकों की जानकारी सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा।
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वल्लभ भवन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में कोचिंग संस्थानों की गतिविधियों को नियंत्रित करने और विद्यार्थियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए गए हैं। उच्च शिक्षा विभाग ने मध्यप्रदेश कोचिंग केंद्र (पंजीयन एवं विनियमन) नियम, 2026 का प्रारूप जारी किया है। इस नीति के तहत राज्य के सभी कोचिंग संस्थानों का पंजीकरण अनिवार्य कर दिया गया है। कोचिंग संचालकों को नए नियमों के लागू होने के 90 दिनों के भीतर पंजीकरण के लिए आवेदन जमा करना होगा। यह पंजीकरण केवल तीन साल की अवधि के लिए मान्य रहेगा और इसकी समय-सीमा समाप्त होने पर इसका नवीनीकरण कराना होगा। किसी भी स्थिति में यह पंजीकरण गैर-हस्तांतरणीय रहेगा। यदि किसी कोचिंग संस्थान की एक से अधिक शाखाएं संचालित हो रही हैं, तो प्रत्येक शाखा को एक पृथक कोचिंग केंद्र माना जाएगा। 
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कोचिंग संस्थानों के लिए अनिवार्य पंजीकरण और पारदर्शिता
नए नियमों के अनुसार प्रत्येक कोचिंग संस्थान के लिए अपनी आधिकारिक वेबसाइट बनाना अनिवार्य होगा। इस वेबसाइट पर संस्थान में पढ़ाए जा रहे पाठ्यक्रमों, कुल शुल्क, शिक्षकों की शैक्षणिक योग्यता, उपलब्ध बुनियादी सुविधाओं और शिकायत निवारण प्रक्रिया की पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। कोचिंग संचालकों को परीक्षा की तैयारी और शुल्क विवरण की पूरी स्पष्टता देनी होगी ताकि विद्यार्थियों और अभिभावकों को पारदर्शी सूचना मिल सके। इसके अलावा, प्रवेश तथा पठन-पाठन की प्रक्रिया के दौरान किसी भी विद्यार्थी के साथ धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकेगा। शैक्षणिक प्रदर्शन अथवा अन्य आधारों पर छात्रों के अलग समूह बनाने पर भी रोक लगाई गई है। विशेष आवश्यकता वाले विद्यार्थियों के लिए कोचिंग परिसरों को दिव्यांग-अनुकूल बनाना और ट्यूटरों को उनके प्रति संवेदनशील रखना अनिवार्य किया गया है।
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शिक्षकों की योग्यता और विद्यार्थियों की सुरक्षा के कड़े मानक
कोचिंग संस्थानों में पठन-पाठन कार्य के लिए ट्यूटर के पद पर नियुक्ति हेतु न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता स्नातक तय की गई है। विद्यार्थियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कुछ विशेष पृष्ठभूमियों वाले व्यक्तियों को ट्यूटर या सहायक कर्मचारी के रूप में नियुक्त करने पर प्रतिबंध रहेगा। संस्थानों में पर्याप्त संख्या में प्रशिक्षित सुरक्षा कर्मियों तथा योग्य मानसिक स्वास्थ्य परामर्शदाताओं की तैनाती अनिवार्य होगी। परिसरों में विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए उपयुक्त स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे, लेकिन विद्यार्थियों की निजता का ध्यान रखते हुए शौचालय, चेंजिंग रूम और परामर्श कक्ष जैसे संवेदनशील स्थानों पर रिकॉर्डिंग पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी। इसके साथ ही कोचिंग परिसरों में पर्याप्त बैठक व्यवस्था, स्वच्छ पेयजल, साफ-सफाई, प्राथमिक चिकित्सा और आपातकालीन स्थितियों से निपटने के आवश्यक प्रबंध करने होंगे। आगंतुकों का नियमित रिकॉर्ड बनाए रखना और सुरक्षा प्रोटोकॉल की नियमित समीक्षा करना भी आवश्यक होगा।

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मानसिक स्वास्थ्य परामर्श और अपील की वैधानिक व्यवस्था
प्रतियोगी परीक्षाओं के तनाव को देखते हुए विद्यार्थियों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता और कॅरिअर मार्गदर्शन व्यवस्था को प्राथमिकता दी गई है। संस्थानों को राज्य सरकार की मानसिक स्वास्थ्य नीति के अनुरूप कार्य करना होगा और नियमित रूप से परामर्श सत्र आयोजित करने होंगे। अभिभावकों के साथ निरंतर संवाद कायम रखकर विद्यार्थियों की समस्याओं का समय पर समाधान खोजना होगा। नियमों के उल्लंघन या अन्य कारणों से यदि किसी कोचिंग केंद्र का पंजीकरण या नवीनीकरण खारिज, निलंबित अथवा रद्द कर दिया जाता है, तो संचालक के पास इसके विरुद्ध अपील करने का कानूनी अधिकार होगा। संबंधित आदेश प्राप्त होने के 30 दिनों के भीतर संभागायुक्त के समक्ष अपील प्रस्तुत की जा सकती है। संभागायुक्त को सुनवाई की प्रक्रिया पूरी करने के बाद 45 दिनों की अवधि के भीतर उस अपील पर अपना अंतिम निर्णय देना होगा।
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