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आयुष्मान में अब एनएबीएच की परीक्षा: बड़े शहरों के 90 निजी अस्पतालों पर कार्रवाई का दबाव, 24 घंटे का अल्टीमेटम

Wed, 07 Oct 2026 05:29 PM IST
Sandeep Kumar Tiwari न्यूज डेस्क,अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना से जुड़े निजी अस्पतालों के लिए एनएबीएच प्रमाणपत्र की अनिवार्यता अब निर्णायक दौर में पहुंच गई है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के 90 निजी अस्पतालों के पास प्रमाणपत्र नहीं है। विभाग ने 24 घंटे में प्रक्रिया पूरी करने का अल्टीमेटम दिया है। खास बात यह है कि निजी अस्पताल 8 अक्टूबर से भुगतान और एनएबीएच की शर्त के विरोध में आयुष्मान का बहिष्कार करने की चेतावनी भी दे चुके हैं।
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एनएबीएच का विरोध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश में आयुष्मान योजना के तहत निजी अस्पतालों के लिए एनएबीएच प्रमाणपत्र की अनिवार्यता अब जमीन पर उतर गई है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के 90 निजी अस्पताल ऐसे हैं, जिनके पास अभी एनएबीएच प्रमाणपत्र नहीं है। विभाग ने इन अस्पतालों को प्रमाणपत्र की प्रक्रिया पूरी करने के लिए अंतिम 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। तय समय में शर्त पूरी नहीं करने वाले अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों का इलाज रोकने की कार्रवाई की जा सकती है। नई व्यवस्था ऐसे समय लागू हुई है, जब प्रदेश के निजी अस्पताल पहले ही आयुष्मान के भुगतान में देरी और एनएबीएच की अनिवार्यता को लेकर नाराज हैं। अस्पताल संगठनों ने 8 अक्टूबर से आयुष्मान योजना का अनिश्चितकालीन बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। ऐसे में चार बड़े शहरों के अस्पतालों पर एनएबीएच की कार्रवाई और निजी अस्पतालों के प्रस्तावित बहिष्कार ने आयुष्मान मरीजों के इलाज को लेकर दबाव बढ़ा दिया है।
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1953 अस्पताल योजना में, 813 निजी
विभागीय आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में आयुष्मान योजना से कुल 1,953 अस्पताल जुड़े हैं। इनमें 1,140 सरकारी और 813 निजी अस्पताल हैं। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में कुल 739 अस्पताल आयुष्मान योजना से संबद्ध हैं। इनमें 418 निजी अस्पताल हैं। विभाग के अनुसार 328 निजी अस्पतालों के पास एनएबीएच प्रमाणपत्र है, जबकि 90 निजी अस्पताल अभी प्रमाणपत्र की शर्त पूरी नहीं कर पाए हैं। यही 90 अस्पताल फिलहाल विभाग के निशाने पर हैं।

नए मरीजों पर सबसे पहले असर
नई व्यवस्था का सीधा असर उन मरीजों पर पड़ेगा, जो इन अस्पतालों में पहली बार आयुष्मान योजना के तहत इलाज कराने पहुंचेंगे। बिना जरूरी एनएबीएच प्रमाणपत्र वाले अस्पतालों को नए मरीजों का आयुष्मान इलाज लेने की अनुमति नहीं होगी। यानी अस्पतालों के पास अब दो विकल्प हैं। एनएबीएच की जरूरी प्रक्रिया पूरी करें या आयुष्मान के नए मरीजों का इलाज लेने से बाहर हो जाएं। आयुष्मान की राज्य स्तरीय प्रक्रिया में एनएबीएच मान्यता समाप्त होने या शर्तों का पालन नहीं होने की स्थिति में अस्पताल की संबद्धता खत्म करने की कार्रवाई का प्रावधान पहले से मौजूद है।
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पहले छह महीने की मोहलत, अब समयसीमा खत्म
एनएबीएच की अनिवार्यता पहले एक अप्रैल से लागू की जानी थी। निजी अस्पतालों की मांग के बाद उन्हें छह महीने का अतिरिक्त समय दिया गया था। इसके बाद एक अक्टूबर से नई व्यवस्था लागू कर दी गई। अब विभाग का रुख सख्त है। जिन अस्पतालों ने अभी तक प्रमाणपत्र हासिल नहीं किया है, उन्हें अंतिम मौका दिया जा रहा है।

नए अस्पतालों के लिए भी एनएबीएच जरूरी
सिर्फ पुराने अस्पताल ही नहीं, बल्कि आयुष्मान योजना में नए जनरल अस्पतालों को भी संबद्धता लेने के लिए एनएबीएच प्रमाणपत्र की शर्त पूरी करनी होगी। प्रदेश के अन्य जिलों में भी आगे चलकर यह व्यवस्था लागू किए जाने की तैयारी है। जनजातीय बहुल क्षेत्रों के अस्पतालों को फिलहाल इस अनिवार्यता से राहत दी गई है, ताकि दूरदराज के क्षेत्रों में मरीजों के लिए इलाज की उपलब्धता प्रभावित न हो।

अस्पतालों की आपत्ति, खर्च भी बढ़ेगा, भुगतान भी अटका
निजी अस्पताल संचालक एनएबीएच की अनिवार्यता के साथ आयुष्मान भुगतान में देरी और पैकेज दरों को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। अस्पताल संगठनों का कहना है कि एनएबीएच के मानकों को पूरा करने में स्टाफ, उपकरण, दस्तावेजी व्यवस्था और दूसरी सुविधाओं पर अतिरिक्त खर्च आता है। दूसरी ओर अस्पताल संगठनों का दावा है कि कई अस्पतालों के आयुष्मान क्लेम महीनों से लंबित हैं। इसी को लेकर प्रदेश के निजी अस्पताल 8 अक्टूबर से योजना के बहिष्कार की चेतावनी दे चुके हैं।

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सरकार का तर्क, इलाज की गुणवत्ता जरूरी
आयुष्मान भारत निरामयम के सीईओ अरविंद कुमार शाह के अनुसार एनएबीएच की शर्त मरीजों को बेहतर और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से लागू की जा रही है। समयसीमा बढ़ाने का निर्णय राज्य कार्यकारिणी समिति के स्तर पर होगा।
एनएबीएच अस्पतालों में गुणवत्ता, मरीजों की सुरक्षा और तय मानकों के पालन से जुड़ी मान्यता व्यवस्था है।

 
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