बस
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आईआईएम इंदौर और एसपीए के साथ हुआ एमओयू
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के शुभारंभ कार्यक्रम के दौरान मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (एमपीवायपीआईएल) ने आईआईएम इंदौर और स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए) के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए। एमपीवायपीआईएल के प्रबंध संचालक मनीष सिंह ने एमओयू का आदान-प्रदान किया। इसके जरिए सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में शोध, तकनीकी विशेषज्ञता और बेहतर प्लानिंग को बढ़ावा देने पर जोर रहेगा। सीएम ने कहा कि सरकार जनता के लिए लगातार काम कर रही हैं।
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सात शहरों में 351 बसों से शुरुआत
पहले चरण में सबसे ज्यादा बसें इंदौर में संचालित होंगी। शहरवार व्यवस्था इस तरह है। इंदौर: 145 बसें, इनमें 50 इंटरसिटी और 95 इंट्रासिटी, भोपाल: 106 बसें, इनमें 23 इंटरसिटी और 83 इंट्रासिटी, जबलपुर: 67 बसें, इनमें 14 इंटरसिटी और 53 इंट्रासिटी, रीवा: 18 इंटरसिटी बसें, देवास: 10 इंटरसिटी बसें, कटनी: 3 इंटरसिटी बसें, और भिंड: 2 इंटरसिटी बसें शामिल हैं। इस तरह शुरुआती चरण में शहरों के भीतर और शहरों के बीच, दोनों तरह की बस सेवाएं शुरू की गई हैं।
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निजी ऑपरेटर चलाएंगे बसें, सरकार की रहेगी निगरानी
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को निजी जनभागीदारी यानी पीपीपी मॉडल पर संचालित किया जाएगा। बसों का संचालन निजी ऑपरेटर करेंगे, जबकि सरकार और उससे जुड़ी परिवहन व्यवस्था इनके संचालन की निगरानी करेगी। बसों के रूट, लोकेशन और समयबद्धता की निगरानी के लिए कमांड-कंट्रोल सेंटर बनाए गए हैं। मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एवं इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड और उसकी सात क्षेत्रीय कंपनियों के माध्यम से निगरानी व्यवस्था को संचालित किया जाएगा।
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आईटीएमएस से हर बस की रियल टाइम निगरानी
सेवा की सबसे अहम विशेषताओं में बसों की तकनीक आधारित निगरानी शामिल है। आईटीएमएस के जरिए बस की लोकेशन, संचालन और समयबद्धता पर रियल टाइम नजर रखी जाएगी। बसों में व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग डिवाइस लगाए गए हैं, जिससे उनकी लाइव लोकेशन पता चल सकेगी। यात्रियों को बस और यात्रा से जुड़ी जानकारी देने के लिए पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम भी इस्तेमाल किया जाएगा।
सीसीटीवी और पैनिक बटन से सुरक्षा
हर बस में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं। इससे बस के भीतर यात्रियों की सुरक्षा पर नजर रखी जा सकेगी। खास तौर पर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निगरानी व्यवस्था तैयार की गई है। आपात स्थिति में यात्री पैनिक बटन का इस्तेमाल कर सकेंगे। इसके अलावा बसों में लाइव लोकेशन ट्रैकिंग की सुविधा भी रहेगी।
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प्रशिक्षित ड्राइवर संभालेंगे बसों का संचालन
नई व्यवस्था में बस चालकों के प्रशिक्षण पर भी जोर दिया गया है। चालकों को आधुनिक तकनीक, सुरक्षित ड्राइविंग और इलेक्ट्रिक व सीएनजी बसों के संचालन से जुड़ा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इंदौर और छिंदवाड़ा में इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर स्थापित किए गए हैं। इसके अलावा भोपाल, बैतूल, छतरपुर, उज्जैन और ग्वालियर में पांच रीजनल ड्राइविंग ट्रेनिंग सेंटर तथा जिला स्तर पर 22 ड्राइवर ट्रेनिंग सेंटर तैयार किए जा रहे हैं।
2031 तक 15 हजार बसों का लक्ष्य
सरकार ने इस सेवा को चरणबद्ध तरीके से पूरे प्रदेश में विस्तार देने की योजना बनाई है। पहले वर्ष में करीब 1,500 बसें संचालित करने का लक्ष्य है। इसके बाद हर साल करीब 2,500 से 3,000 बसें जोड़ने की योजना है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2031 तक करीब 15 हजार बसों का नेटवर्क तैयार करना है। इसके साथ ही प्रदेश की करीब 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। यानी योजना का फोकस केवल शहरों तक सीमित न रहकर गांवों और शहरों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाने पर भी है।
लोकपथ एप पर मिलेगी बसों की टाइमिंग
मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा को डिजिटल प्लेटफॉर्म से भी जोड़ा जा रहा है। आने वाले समय में इन बसों की समय-सारणी लोकपथ एप पर उपलब्ध कराई जाएगी। यात्री यह देख सकेंगे कि कौन-सी बस किस स्थान से चलेगी, उसका समय क्या है और उसे कहां से लिया जा सकता है। लोकपथ एप पर फिलहाल सड़क और मार्गों की जानकारी के साथ पर्यटन स्थल, टोल नाके, अस्पताल और पुलिस थानों जैसी जरूरी जानकारी उपलब्ध है।
स्मार्ट मॉनिटरिंग से लेकर पैनिक बटन तक
रियल टाइम मॉनिटरिंग- आईटीएमएस से बसों की लोकेशन, संचालन और समयबद्धता पर नजर।
कमांड-कंट्रोल सेंटर- बसों के संचालन और लोकेशन की निगरानी।
CCTV कैमरे- हर बस में यात्रियों की सुरक्षा के लिए कैमरे।
पैनिक बटन- आपात स्थिति में मदद के लिए सुविधा।
लाइव लोकेशन-ट्रैकिंग डिवाइस से बस की स्थिति की जानकारी।
यात्रियों को मिलेंगी ये सुविधाएं
पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम से बस और यात्रा की जानकारी।
प्रशिक्षित ड्राइवरों के जरिए बस संचालन।
यात्रियों की शिकायतों के समाधान की व्यवस्था।
तकनीक के जरिए सुरक्षित और समयबद्ध यात्रा पर जोर।
शहरों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों को बस कनेक्टिविटी से जोड़ने की योजना।
पीपीपी मॉडल पर चलेगी सेवा
निजी ऑपरेटर चलाएंगे बसें, सरकार करेगी निगरानी
निजी ऑपरेटरों के लिए कमाई के अतिरिक्त विकल्प
बसों में विज्ञापन से अतिरिक्त आय।
कार्गो सेवा से कमाई बढ़ाने का विकल्प।
आधुनिक डिपो और टर्मिनल सुविधाओं का इस्तेमाल।