मध्यप्रदेश में स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री को लेकर सरकार ने पटवारियों की भूमिका स्पष्ट करने की तैयारी की है। पटवारी पदेन रहेगा, जबकि रजिस्ट्री की निगरानी एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार करेंगे; विवाद होने पर शासन शासकीय वकील के जरिए पैरवी करेगा।
स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि की मुफ्त रजिस्ट्री को लेकर सरकार ने पटवारियों की चिंता का समाधान करने की तैयारी कर ली है। राजस्व विभाग के अधिकारियों के अनुसार रजिस्ट्री की प्रक्रिया में संबंधित हल्के का पटवारी पदेन रहेगा। रजिस्ट्री की प्रक्रिया के लिए एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार नोडल अधिकारी रहेंगे। सरकार जल्द ही इस संबंध में सर्कुलर जारी करेगी।
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जानकारी के अनुसार, रजिस्ट्री दस्तावेज में स्पष्ट रूप से उल्लेख रहेगा कि यदि कोई व्यक्ति धोखाधड़ी करता है या गलत जानकारी देकर रजिस्ट्री कराता है तो संबंधित व्यक्ति ही इसके लिए जिम्मेदार और आरोपी होगा। ऐसी स्थिति में पटवारी की कोई भूमिका नहीं मानी जाएगी। इसके बाद भी यदि रजिस्ट्री को लेकर कोई विवाद सामने आता है तो शासन की ओर से शासकीय वकील मामले की पैरवी करेंगे।
भूमिका पर सरकार और पटवारी संघ के बीच मतभेद
सरकार की इस व्यवस्था के बावजूद पटवारी संघ अपनी भूमिका को लेकर संतुष्ट नहीं है। प्रांतीय पटवारी संघ के सचिव धर्मेंद्र चौबे का कहना है कि पटवारी को पंजीयक या निष्पादक के रूप में काम करने का अधिकार नहीं है। यदि सरकार पटवारी को यह जिम्मेदारी दे रही है तो उसे इसका स्पष्ट लिखित आदेश जारी करना चाहिए। चौबे के अनुसार, पंजीयन अधिनियम और राजस्व नियमों में निष्पादन तथा रजिस्ट्री से जुड़े अधिकार निर्धारित हैं। उनका तर्क है कि पटवारी राजस्व अधिकारी की श्रेणी में नहीं आता और इसलिए उसे ऐसी जिम्मेदारी देने से पहले सरकार को कानूनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
दो दौर की बातचीत, लेकिन नहीं बनी सहमति
पटवारी संघ का कहना है कि इस मुद्दे पर शासन के अधिकारियों के साथ दो दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन सहमति नहीं बन सकी। संघ ने सरकार से लिखित में अधिकार और जिम्मेदारी स्पष्ट करने की मांग की है। पटवारियों का एक और तर्क है कि जिन आबादी क्षेत्रों की जमीन ग्राम पंचायतों के अधीन आती है, वहां पंचायत विभाग की भूमिका भी स्पष्ट की जानी चाहिए। संघ का कहना है कि भविष्य में किसी रजिस्ट्री को लेकर विवाद होने पर निष्पादक को भी न्यायालयी प्रक्रिया का सामना करना पड़ सकता है। इसी आशंका के कारण पटवारी जिम्मेदारी लेने से पहले लिखित सुरक्षा चाहते हैं।
सरकार का दावा- पटवारी पर नहीं आएगी कानूनी आंच
राजस्व विभाग का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था में पटवारी को रजिस्ट्री का जिम्मेदार अधिकारी नहीं बनाया जा रहा है। वह पदेन अपनी भूमिका निभाएगा, जबकि प्रक्रिया की निगरानी और नोडल जिम्मेदारी एसडीएम, तहसीलदार और नायब तहसीलदार की होगी। सरकार की ओर से जारी होने वाले सर्कुलर से यह भी स्पष्ट होगा कि पटवारी की वास्तविक भूमिका क्या होगी, रजिस्ट्री में किस अधिकारी के हस्ताक्षर होंगे और किसी गलत जानकारी या धोखाधड़ी की स्थिति में जिम्मेदारी किसकी तय होगी। बता दें, गांवों में मकानों व भूखंडों की स्वामित्व योजना के तहत ग्रामीण आबादी भूमि के रिकॉर्ड को व्यवस्थित कर लोगों को संपत्ति संबंधी अधिकार देने की प्रक्रिया चल रही है। इसके तहत 17 सितंबर को पीएम नरेंद्र मोदी के जन्म दिन से शुरू हुए सेवा संकल्प अभियान के तहत निशुल्क रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू हुई है, लेकिन इसमें पटवारियों की भूमिका को लेकर गतिरोध बना हुआ है।