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एमपी में ओबीसी आरक्षण पर सियासी संग्राम तेज: कमलनाथ का भाजपा पर हमला, 27% आरक्षण बहाल करने की मांग

Sat, 10 Oct 2026 03:49 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्यप्रदेश में ओबीसी के 27% आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद भाजपा और कांग्रेस के बीच सियासत तेज हो गई है। पूर्व सीएम कमलनाथ ने नया कानून लाकर आरक्षण बहाल करने की मांग की। साथ ही सरकार पर आरोप लगाया कि कोर्ट में सही आकड़े नहीं रखे और अब कांग्रेस पर आरोप लगा रहे हैं, जबकि विवेक तन्खा ने सरकार की कानूनी पैरवी पर सवाल उठाए। 
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पूर्व सीएम कमलनाथ - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्यप्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के 27% आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने भाजपा सरकार पर ओबीसी आरक्षण का पक्ष अदालत में मजबूती से नहीं रखने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि सरकार सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करे और विधानसभा में नया कानून लाकर 27% आरक्षण बहाल करे। बता दें इससे पहले मुख्यमंत्री मोहन यादव ने तत्कालीन कांग्रेस सरकार की ओर से आरक्षण लागू करने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इसमें कानूनी खामियां थीं और राज्य सरकार हाईकोर्ट के फैसले का कानूनी परीक्षण कर आगे की कार्रवाई करेगी।  
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कमलनाथ बोले- भाजपा ने आरक्षण की रक्षा नहीं की
कमलनाथ ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने ओबीसी आरक्षण को बचाने के लिए अदालत में प्रभावी पैरवी नहीं की। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने 2019 में विधानसभा में कानून पारित कर ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण दिया था। उनके मुताबिक, यह फैसला संवैधानिक प्रक्रिया के तहत लिया गया था। कमलनाथ ने कहा कि आरक्षण की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन 2020 के बाद सत्ता में रही भाजपा सरकारों ने अदालत के सामने ओबीसी वर्ग की आबादी से जुड़े सही आंकड़े नहीं रखे। उन्होंने भाजपा नेताओं के उन बयानों पर भी आपत्ति जताई, जिनमें कांग्रेस सरकार की प्रक्रिया को जल्दबाजी में लिया गया फैसला बताया जा रहा है। कमलनाथ ने कहा कि अगर भाजपा सरकार ओबीसी वर्ग के हितों को लेकर गंभीर है, तो उसे तुरंत सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगानी चाहिए और विधानसभा में नया कानून पारित कर 27% आरक्षण बहाल करना चाहिए। 
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विवेक तन्खा ने भी सरकार की पैरवी पर उठाए सवाल
राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने भी हाईकोर्ट में सरकार की पैरवी पर सवाल उठाए। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि कम तैयारी और प्रभावी कानूनी पैरवी के अभाव में मध्यप्रदेश सरकार हाईकोर्ट में ओबीसी आरक्षण का मामला हार गई। तन्खा ने कहा कि कांग्रेस ने 2018 के विधानसभा चुनाव के वचन पत्र के मुताबिक ओबीसी वर्ग को 27% आरक्षण दिया था, लेकिन भाजपा सरकार उस कानून को अदालत में स्वीकार्यता नहीं दिला पाई।

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यह दिया है हाईकोर्ट ने आदेश 
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 9 अक्टूबर 2026 को ओबीसी आरक्षण पर बड़ा फैसला सुनाते हुए 27% आरक्षण करने वाले 2019 के कानून को असंवैधानिक करार देकर निरस्त कर दिया। इसके बाद सरकारी नौकरियों और उच्च शिक्षा में ओबीसी आरक्षण 14% रहेगा। अदालत ने यह भी कहा कि आरक्षण की सीमा 50% से अधिक करने के लिए राज्य सरकार असाधारण परिस्थितियों को साबित नहीं कर सकी।  29 सितंबर 2022 से भर्ती प्रक्रिया में रोके गए 13% पदों पर अनारक्षित वर्ग के पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने के निर्देश दिए गए हैं।
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