भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल
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मध्य प्रदेश में ओबीसी आरक्षण पर हाईकोर्ट के फैसले के बाद भाजपा ने कांग्रेस को घेरते हुए 27 प्रतिशत आरक्षण के मुद्दे पर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने 2019 में राजनीतिक लाभ लेने की जल्दबाजी में ओबीसी आरक्षण बढ़ाने का फैसला किया, लेकिन उसे मजबूत कानूनी आधार देने के लिए जरूरी तैयारी नहीं की। अब फैसले के बाद पैदा हुई कानूनी स्थिति के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराकर कांग्रेस अपनी जवाबदेही से बच रही है। खंडेलवाल ने हाईकोर्ट के निर्णय की कंडिका 215 का हवाला देते हुए कहा कि अदालत ने 2019 के अध्यादेश को पर्याप्त तैयारी के अभाव और अनुचित जल्दबाजी में लाए जाने का उल्लेख किया है। उनके मुताबिक, यह टिप्पणी तत्कालीन कांग्रेस सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करती है। कांग्रेस ने ओबीसी वर्ग को आरक्षण का लाभ दिलाने के नाम पर फैसला तो लिया, लेकिन उसके संवैधानिक और कानूनी पक्षों को मजबूत करने में गंभीर चूक की।
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भाजपा ने 27 प्रतिशत आरक्षण के संकल्प को दोहराया
हाईकोर्ट के फैसले के बाद भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार ओबीसी वर्ग के सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। सरकार न्यायालय के निर्णय के सभी कानूनी पहलुओं का अध्ययन करने के बाद आगे की रणनीति तय करेगी। जरूरत पड़ने पर अन्य राजनीतिक दलों के साथ चर्चा और समन्वय से भी आगे का रास्ता तलाशा जाएगा। खंडेलवाल ने कहा कि भाजपा सरकार 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के संकल्प से पीछे नहीं हटेगी। इसके लिए जरूरी कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत आगे बढ़ा जाएगा। हालांकि, सरकार की अगली कार्रवाई और आरक्षण को लेकर आगे की कानूनी रणनीति अभी तय होना बाकी है।
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कांग्रेस से पूछा- कानून बनाते समय तैयारी क्यों नहीं की?
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कांग्रेस से सवाल किया कि यदि उसकी मंशा ओबीसी वर्ग को अधिकार दिलाने की थी, तो आरक्षण बढ़ाने के फैसले के समय पर्याप्त संवैधानिक आधार और प्रभावी कानूनी प्रावधान सुनिश्चित क्यों नहीं किए गए? उन्होंने कहा कि ओबीसी आरक्षण लाखों लोगों के अधिकारों और युवाओं के भविष्य से जुड़ा विषय है। ऐसे मुद्दे पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बजाय सभी पक्षों को जिम्मेदारी से काम करना चाहिए। खंडेलवाल ने कांग्रेस पर अपनी सरकार की कानूनी खामियों का जवाब देने के बजाय भाजपा पर दोष मढ़ने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को बताना चाहिए कि वह अपने फैसले में हुई चूक की जवाबदेही से कब तक बचती रहेगी।