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MP News: क्या मध्यप्रदेश बना रहेगा देश का टाइगर स्टेट, कल पीएम जारी करेंगे आंकड़े

सार

मध्यप्रदेश टाइगर स्टेट रहेगा या नहीं, इसका खुलासा रविवार को होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी प्रोजेक्ट टाइगर के 50 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में बाघों के आंकड़े जारी करने वाले हैं। 
 
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Tiger Census - फोटो : अ
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विस्तार
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मध्यप्रदेश पिछले कई दशकों से देश का टाइगर स्टेट बना हुआ है। 2010 के आंकड़ों में यह तमगा गंवाने के बाद मध्यप्रदेश ने 2018 में इसे दोबारा हासिल किया था। तब भी कर्नाटक सिर्फ दो नंबर से पिछड़ा था। इस वजह से बार-बार सवाल उठ रहे हैं कि क्या मध्यप्रदेश देश का टाइगर स्टेट बना रहेगा? इसका जवाब रविवार को मिल जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लैंडस्केप के आधार पर बाघों की संख्या जारी करने वाले हैं। हालांकि, मध्यप्रदेश वन विभाग के अधिकारी आशान्वित है कि न केवल मध्यप्रदेश के पास यह टैग कायम रहेगा, बल्कि बाघों की बढ़ती संख्या की वजह से पीठ पर थपकी भी मिलेगी। 
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दरअसल, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को बांदीपुर टाइगर रिजर्व जा रहे हैं। वहां प्रोजेक्ट टाइगर के 50 साल पूरे होने पर कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। इस दौरान वे बाघ संरक्षण के लिए अमृत काल का विजन नाम की पुस्तक जारी करेंगे। साथ ही बाघों के आंकड़े जारी करेंगे। मध्यप्रदेश के वन विभाग के अधिकारियों का अनुमान है कि मध्यप्रदेश में बाघों की संख्या बढ़कर 700 के पार हो गई है। टाइगर रिजर्व में बाघों की बढ़ती संख्या की वजह से नए टाइगर रिजर्व बनाने और नए अभयारण्यों में बाघों को शिफ्ट भी किया गया है। बाघों की पिछली गणना 2018 में हुई थी, जिसके आंकड़े 2019 में समने आए थे। तब मध्य प्रदेश में 526 और कर्नाटक में 524 बाघ होने की घोषणा की गई थी। दो बाघ ज्यादा होने से मध्यप्रदेश ने आठ साल पहले खोया टाइगर स्टेट का दर्जा दोबारा हासिल किया था।  

पिछले साल हुई थी बाघों की गणना 
भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून हर चार साल में बाघों की गणना कराता है। इसी कड़ी में 2022 में बाघों की गणना कराई गई थी। इसके लिए ट्रैप कैमरे से बाघ के फोटो लेने, सैटेलाइट इमेजिंग और पगमार्क आदि विधियों का इस्तेमाल किया गया। मध्यप्रदेश के चीफ वाइल्डलाइफ वार्डन या प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) जसबीर सिंह ने कहा कि हमें पूरी उम्मीद है कि मध्यप्रदेश बाघों की संख्या के मामले में देश में अग्रणी रहेगा। 
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टाइगर रिजर्व फुल, इसलिए नए तलाश रहे 
मध्यप्रदेश की बात करें तो यहां देश में सर्वाधिक छह टाइगर रिजर्व है। सतपुड़ा, पन्ना, पेंच, कान्हा, बांधवगढ़ और संजय दुबरी टाइगर रिजर्व हैं। पांच नेशनल पार्क और 10 सेंचुरी भी हैं। दमोह जिले के नौरादेही अभयारण्य को छठवां टाइगर रिजर्व बनाने की तैयारी चल रही है। 2018 में यहां बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व से चार बाघों को छोड़ा गया था। आज यह कुनबा बढ़कर 14 बाघों का हो चुका है। इसी तरह पिछले महीने ही माधव नेशनल पार्क में एक नर और दो मादा बाघों को छोड़ा गया है। 

बाघों का शिकार एक बड़ी चुनौती
मध्यप्रदेश के टाइगर स्टेट खिताब को शिकारी लगातार चुनौती दे रहे हैं। 2022 में भी टाइगर रिजर्व और अन्य जंगलों में 34 बाघों की मौत हुई। वहीं, कर्नाटक में सिर्फ 15 बाघ मारे गए। सूत्रों का दावा है कि बाघों का शिकार हो रहा है। वहीं, बाघों की बढ़ती संख्या की वजह से टेरिटोरियल फाइट और अन्य संक्रमणों की वजह से भी उनकी मौतें हो रही हैं। इसी तरह शहरी इलाकों में भी बाघों के आने से इंसानों के साथ उनके संघर्ष की खबरें आ रही हैं। जसबीर सिंह ने कहा कि प्रदेश में बाघों की अप्राकृतिक मौतों के लिए जो जिम्मेदार हैं, उन पर कार्रवाई भी हुई है। किसान खेतों में सुअरों को आने से रोकने के लिए करंट वाले वायर छोड़ देते हैं, जिसका शिकार बाघ भी हुए हैं। हमें इन बाघों की एक्सीडेंटल मौतों को रोकना है। हालांकि, मध्यप्रदेश सरकार ने विधानसभा में बताया कि 2022 में बाघों का शिकार हुआ और इसके आरोप में 31 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। 
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