सार
सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण (SEIAA) की उस शिकायत को बेहद गंभीर मानते हुए केंद्र सरकार से जवाब मांगा है, जिसमें कहा गया है कि प्रदेश के दो वरिष्ठ आईएएस अधिकारियों ने जानबूझकर संस्था को निष्क्रिय कर दिया और अवैध तरीके से सैकड़ों पर्यावरणीय स्वीकृतियां (Environmental Clearances - ECs) जारी कीं।
मध्य प्रदेश राज्य पर्यावरण प्रभाव आकलन प्राधिकरण की मूल्यांकन प्रक्रिया को बायपास कर 237 प्रोजेक्ट्स को पर्यावरणीय स्वीकृतियां देने का मामला सुप्रीम कोर्ट में है। सोमवार को सीया के मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। इसमें सुप्रीम कोर्ट ने मामले को बहुत गंभीर माना और केंद्र सरकार से जवाब मांगा। सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सीया के चेयरमैन एसएनएस चौहान ने आरोप लगाया है कि सीया की सदस्य सचिव उमा महेश्वर और पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत कोठारी ने मिलकर प्राधिकरण की बैठकों में देरी की, ताकि खनन माफियाओं को फायदा पहुंचाया जा सके। आरोप है कि इसके लिए सीया की अनिवार्य मूल्यांकन प्रक्रिया को भी दरकिनार कर कई प्रोजेक्ट्स को बिना अधिकार स्वीकृति दे दी। इस मामले में कोर्ट ने टिप्पणी की कि आईएएस अधिकारी पर्यावरण स्वीकृति जारी करेंगे, तो फिर सीया की स्वतंत्र संस्था होने का क्या मतलब रह जाएगा? कोर्ट ने इस मुद्दे पर पर्यावरण मंत्रालय से स्पष्ट जवाब मांगा है। साथ की सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल से इस मामले में जवाब तलब किया है। केंद्र और राज्य सरकार से 1 सितंबर तक जवाब मांगा गया हैं।
ये भी पढ़ें-
MP News: 1060 कार्मिकों को नियुक्ति पत्र बांटे, सीएम बोले- एमपी देश की विद्युत आवश्यकताओं की भी पूर्ति कर रहा
यह है मामला
सीया के अध्यक्ष एसएनएस चौहान और पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत कोठारी के बीच लंबे समय तक विवाद चला। इसके चलते 550 से अधिक आवेदन लंबित हो गए। मई माह की शुरुआत में सीया की सदस्य सचिव उमा महेश्वरी ने बैठकें बंद कर दीं। सीया अध्यक्ष का आरोप है कि उन्होंने सदस्य सचिव और पीएस को कई पत्र बैठक कराने के लिए लिखे, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं दिया गया। फिर अचानक उमा महेश्वरी सिक लिव पर चली गईं और तभी सदस्य सचिव के प्रभार में श्रीमन शुक्ल ने 237 आवेदनों की ईसी जारी कर दी। इसका अनुमोदन प्रमुख सचिव नवनीत कोठारी ने किया। इसमें 45 दिन से बैठक नहीं होने का नियम बताया गया है। दरअसल 45 दिन तक बैठक नहीं होने पर परियोजना प्रस्तावक की अनुशंसा को ईसी माना जाता है। इस पर सीया अध्यक्ष ने आपत्ति ली और कहा कि पीएस को इसका अधिकार ही नहीं है। उन्होंने इस मामले में कई पत्र मुख्य सचिव लिखे, लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। इस बीच पीएस कोठोरी पर सीया अध्यक्ष के कार्यालय पर ताला लगाने का आरोप लग गया। यह मामला मुख्य सचिव तक पहुंचा, जिसके बाद ताला खुलवाया गया।
ये भी पढ़ें-
MP News: शिवराज सिंह चौहान बोले- राइट ब्रदर्स के हवाई जहाज के आविष्कार से पहले ही हमारे पास था पुष्पक विमान
सीएम ने अधिकारियों को हटाया
मामले के तुल पकड़ने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कार्रवाई करते हुए पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत कोठोरी को हटा दिया और राजभवन का प्रमुख सचिव बनाया गया। वहीं, एप्को की कार्यपालन निदेशक और सदस्य सचिव उमा महेश्वरी को भी हटा दिया गया। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है।
ये भी पढ़ें-
MP Cabinet: न्याय विभाग में 610 पद पर होगी भर्ती, श्रीमहाकालेश्वर उज्जैन से पीथमपुर के बीच दौड़ेंगी मेट्रो