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MP News: बंद चेकपोस्ट दोबारा शुरू करने हाईकोर्ट आदेश पर सरकार का मंथन, ट्रांसपोर्टर्स बोले-बढ़ेगा भ्रष्टाचार

Thu, 23 Apr 2026 04:05 PM IST
Anand Pawar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल

सार

मध्य प्रदेश में बंद चेकपोस्ट दोबारा शुरू करने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद ट्रांसपोर्ट कारोबारियों में नाराजगी बढ़ गई है। ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने इसे भ्रष्टाचार बढ़ाने वाला फैसला बताते हुए सरकार से पुनर्विचार की मांग की है। वहीं, सरकार भी कोर्ट के आदेश पर मंथन कर रही है। 
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एमपी में परिवहन विभाग की चेक पोस्ट शुरू करने का विरोध - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मध्य प्रदेश में बंद पड़े परिवहन चेकपोस्टों को दोबारा शुरू करने के हाईकोर्ट के आदेश के बाद सरकार और ट्रांसपोर्ट कारोबारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। एक तरफ राज्य सरकार इस फैसले के कानूनी पहलुओं का परीक्षण करा रही है, वहीं ट्रांसपोर्ट संगठनों ने आदेश के खिलाफ हाईकोर्ट की डबल बेंच में याचिका दायर करने की तैयारी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, मुख्यमंत्री  मोहन यादव के निर्देश पर 30 जून 2024 से प्रदेश के अंतरराज्यीय परिवहन चेकपोस्ट बंद कर दिए गए थे। यह फैसला चेकपोस्टों पर अवैध वसूली और भ्रष्टाचार की लगातार मिल रही शिकायतों के बाद लिया गया था। हालांकि अब जबलपुर हाईकोर्ट ने एक अवमानना याचिका की सुनवाई करते हुए राज्य सरकार को 30 दिनों के भीतर सभी बंद चेकपोस्ट फिर से शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
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यह मामला सतना निवासी रजनीश त्रिपाठी द्वारा दायर अवमानना याचिका से जुड़ा है। दरअसल, प्रदेश में ओवरलोड वाहनों के संचालन, सड़क हादसों में बढ़ोतरी, राजस्व नुकसान और पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभावों को लेकर वर्ष 2015 में जनहित याचिका दायर की गई थी। इस मामले में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि ओवरलोडिंग रोकने के लिए चेकपोस्टों का संचालन लगातार जारी रहेगा। वर्ष 2023 में याचिका के निराकरण के बाद सरकार ने जून 2024 में सभी चेकपोस्ट बंद कर दिए थे, जिसे याचिकाकर्ता ने अदालत की अवमानना बताया।
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हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद राज्य सरकार ने कानूनी राय लेना शुरू कर दिया है। शीर्ष स्तर पर मंथन किया जा रहा है कि अदालत के आदेश का पालन किया जाए या फिर इसे डबल बेंच में चुनौती दी जाए। अंतिम फैसला शासन स्तर पर उच्च स्तरीय समीक्षा के बाद लिया जाएगा। इधर, ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस और इंदौर ट्रक ऑपरेटर एंड ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने भी इस फैसले का विरोध किया है। संगठन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर कहा है कि वे ट्रांसपोर्टरों के हित में हाईकोर्ट की डबल बेंच में रिव्यू पिटीशन दाखिल करेंगे। ट्रांसपोर्ट कारोबारियों का तर्क है कि वर्तमान समय में ओवरलोडिंग रोकने के लिए तकनीकी विकल्प उपलब्ध हैं। उनका कहना है कि टोल प्लाजा पर ऑटोमेटिक वेट ब्रिज, डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम और ओवरलोड वाहनों पर चार गुना जुर्माने जैसी व्यवस्थाएं लागू की जा रही हैं। ऐसे में पुराने चेकपोस्ट मॉडल को दोबारा लागू करना व्यावहारिक नहीं है।
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ऑल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर ने कहा कि पहले चेकपोस्टों पर बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की शिकायतें सामने आती थीं। कई मामलों में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हुई और करोड़ों रुपये की नकदी व बेनामी संपत्ति मिलने के मामले भी उजागर हुए थे।
ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि चेकपोस्ट दोबारा शुरू होने से ट्रक ऑपरेटरों, ड्राइवरों और व्यापारियों की मुश्किलें बढ़ेंगी। इससे माल ढुलाई महंगी होगी, परिवहन व्यवस्था प्रभावित होगी और कारोबार पर असर पड़ेगा। अब नजर इस बात पर है कि राज्य सरकार अदालत के आदेश को स्वीकार करती है या फिर ट्रांसपोर्ट संगठनों के साथ मिलकर कानूनी लड़ाई का रास्ता चुनती है।
  
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