राजधानी के भोजपुरी समाज के लिए इस बार का छठ पर्व बेहद खास रहेगा। लिंक रोड नंबर 3 स्थित पांच नंबर छठ घाट पार्क में प्रदेश का पहला छठ मैया मंदिर बनकर तैयार हो गया है। सोमवार को मंदिर का लोकार्पण महापौर मालती राय, पूर्व मंत्री पीपी शर्मा, नगर निगम अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी, विधायक भगवानदास सबनानी और वार्ड 46 के पार्षद गुड्डू चौहान ने संयुक्त रूप से किया। यह वही घाट है, जहां वर्षों से श्रद्धालु अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य अर्पित करते आ रहे हैं। अब पहली बार यहां छठ मैया का स्थायी मंदिर बन जाने से यह स्थान भोपाल में भोजपुरी आस्था का नया केंद्र बन गया है।
सूर्य के रथ पर आरूढ़ स्वरूप
छठ मैया की प्रतिमा 6 फीट लंबी, 4 फीट चौड़ी और 5 फीट ऊंची है। इसे सूर्य देव के रथ पर आरूढ़ स्वरूप में गढ़ा गया है, जिसमें सात घोड़ों का आकर्षक रथ विशेष ध्यान खींचता है। प्रतिमा निर्माण में 10 से अधिक कलाकारों ने तीन महीने तक लगातार कार्य किया, जबकि संपूर्ण निर्माण में भोजपुरी समाज के सहयोग से लगभग साढ़े चार लाख रुपए का व्यय आया। गौरतलब है कि साल 2022 में रखी गई इस मंदिर की नींव कई चुनौतियों के बीच पूरी हुई। पत्थर टूटने और आर्थिक अड़चनों के बावजूद समाज के लोगों ने मिलकर निर्माण पूरा कराया। अब यह मंदिर न केवल छठ पर्व का प्रमुख स्थल बनेगा, बल्कि भोजपुरी संस्कृति और श्रद्धा का प्रतीक स्थल भी रहेगा।
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महीनों की मेहनत के बाद यह भव्य प्रतिमा तैयार
छठ मैया की प्रतिमा जयपुर के राज्य सम्मानित मूर्तिकार महावीर भारती और निर्मला भारती ने तैयार की है। इसे मकराना के दुर्लभ संगमरमर से तराशा गया है। शिल्पकारों के अनुसार, निर्माण की सबसे बड़ी चुनौती 16 टन वजनी उपयुक्त पत्थर खोजना थी। दो बार पत्थर बीच में ही टूट गए, जिसके बाद तीसरे प्रयास में 8-8 टन के दो ब्लॉकों पर महीनों की मेहनत के बाद यह भव्य प्रतिमा तैयार हो सकी। कलाकारों ने बताया कि इतनी बड़ी मूर्ति पर बारीक नक्काशी करते समय हर रेखा का ध्यान रखना पड़ा ताकि कहीं भी दरार न पड़े।
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पूरे प्रदेश के लिए गर्व का प्रतीक
भोजपुरी समाज का कहना है कि यह मंदिर न केवल भोपाल, बल्कि पूरे प्रदेश के लिए गर्व का प्रतीक बनेगा। छठ मैया की पूजा अब तक निराकार रूप में होती रही है, लेकिन पहली बार हमने उन्हें सूर्य भगवान के रथ पर आरूढ़ साकार रूप दिया है। यह आस्था और परंपरा का अद्भुत संगम है। देश में ऐसे केवल चार मंदिर हैं। दो बिहार में, एक झारखंड के रांची में और अब चौथा भोपाल में स्थापित हुआ है।