भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की सरकार को 2018 में मध्यप्रदेश में हार का सामना करना पड़ा था। वजह ग्वालियर-चंबल संभाग बना था, जहां पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ था। 34 में से सिर्फ सात सीटें ही भाजपा जीत सकी थी। हालांकि, उस समय कांग्रेस के चेहरा रहे ज्योतिरादित्य सिंधिया अब शिवराज के बगल में खड़े होकर वोट मांगेंगे। इसके बाद भी पार्टी कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती। वह इस इलाके के अनुसूचित जाति वोटों को हासिल करने के लिए बाबा साहब यानी डॉ. भीमराव अंबेडकर का सहारा लेगी।
यूं तो अंबेडकर का सहारा भाजपा ने पहले भी लिया है, लेकिन इस बार मौका खास है। 14 अप्रैल को डॉ. भीमराव अंबेडकर की जयंती है और इस दिन के लिए भाजपा ने कई आयोजनों की योजना बनाई है। महू में मुख्य आयोजन होगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान यहां मौजूद रहेंगे। इसके बाद 16 अप्रैल को ग्वालियर में अंबेडकर महाकुंभ का आयोजन होगा, जिसके जरिये मुख्यमंत्री एक बार फिर अनुसूचित जाति वर्ग से मुखातिब होंगे। खास बात यह है कि फरवरी में शिवराज सरकार की विकास यात्राओं की शुरुआत रविदास जयंती से हुई थी और मुख्यमंत्री ने इसके लिए भिंड को ही चुना था। गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा की माने तो 16 अप्रैल को ग्वालियर में बाबा साहब अंबेडकर महाकुंभ आयोजित होगा। इसमें मुख्यमंत्री और सभी मंत्री मौजूद रहेंगे। यह अंतिम पक्ति के व्यक्ति तक सरकार की बात पहुंचाने और उनकी बात सुनने के लिए आयोजित किया गया है। इससे उनके बीच कोई भ्रम ना रहे।
'माई का लाल' भाषण ने पहुंचाया था नुकसान
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 2016 में अनुसूचित जाति और जनजाति के कर्मचारी-अधिकारियों के सम्मेलन में पहुंचे थे। तब चुनावों को डेढ़ साल बचा था। उस समय आरक्षण का मुद्दा गरमाया हुआ था। सुप्रीम कोर्ट तक में सुनवाई हो रही थी। तब चौहान ने कहा था कि 'मेरे रहते कोई माई का लाल आरक्षण खत्म नहीं कर सकता। आरक्षण जारी रहेगा।' उस समय सवर्णों को आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर बहस हो रही थी। सीएम के माई का लाल के बयान को सुनकर सरकार के ही सवर्णों और अगड़ों ने मोर्चा खोल दिया था। सबसे ज्यादा प्रभाव ग्वालियर-चंबल क्षेत्र में ही हुआ था। लोग सड़क पर आ गए थे। दंगों में कुछ लोगों की मौत भी हुई थी। अब भाजपा ग्वालियर में ही अंबेडकर महाकुंभ सम्मेलन कर रही है। इसमें दलित नेताओं को खास तौर पर बुलाया गया है।
क्यों अहम है ग्वालियर-चंबल संभाग
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को सबसे बड़ा झटका ग्वालियर-चंबल संभाग में ही लगा था। 2013 में भाजपा ने इस क्षेत्र में 34 में से 20 सीटें जीती थी, जबकि 2018 में वह सिमटकर सात सीटों पर रह गई थी। कांग्रेस ने 2013 में 12 और 2018 में 27 सीटें हासिल की थी। इस लिहाज से यह क्षेत्र भाजपा के लिए चुनौती बना हुआ है। उसके लिए राहत की बात यह है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया ने 2018 में कांग्रेस को ताकत दी थी और अब वे भाजपा के साथ हैं।
महू में अंबेडकर जयंती पर जुटेंगे सभी पार्टियों के नेता
मध्यप्रदेश में अंबेडकर जयंती पर प्रदेशभर में कार्यक्रम होंगे। 14 अप्रैल को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान महू में डॉ. अंबेडकर के स्मारक पर कार्यक्रम में शामिल होंगे। पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ भी महू जाएंगे। कांग्रेस पार्टी आष्टा में बड़ा कार्यक्रम करने वाली है। भीम आर्मी चंद्रशेखर आजाद के साथ समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव, राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष जयंत चौधरी और जयस नेताओं को एकमंच पर लाएगी। बसपा भी प्रदेश भर में कार्यक्रम करेगी।
विंध्य में उथल-पुथल का डर, 24 को पीएम आएंगे रीवा
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह दो महीने पहले सतना आए थे। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 24 अप्रैल को रीवा आने वाले हैं। प्रधानमंत्री पंयायत राज कार्यक्रम और छह हजार करोड़ रुपये की जल जीवन मिशन की बाणसागर समूह जल प्रदाय परियोजना फेस-2 का शुभारंभ करेंगे। इस क्षेत्र में बड़े नेताओं के दौरो से चर्चा है कि विंध्य क्षेत्र में केंद्रीय नेतृत्व को भी उथल-पुथल का डर है। 2018 में विंध्य की 30 सीटों में से 25 सीटें भाजपा ने जीती है। इसके बाद भी क्षेत्र की उपेक्षा के कारण लोगों में नाराजगी है। क्षेत्र में आम आदमी पार्टी की बढ़ती सक्रियता ने भी बीजेपी की चिंता बढ़ा दी है। सिंगरौली में आम आदमी पार्टी ने महापौर का चुनाव जीता है। रीवा और सतना में भी पार्टी का प्रसार बढ़ रहा है।