भैषजिक विज्ञान विभाग, डॉ. हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर (एमपी) की प्रोफेसर एवं डीन डॉ. अस्मिता गजभिये पाटिल को राजीव रंजन सिंह कैबिनेट मंत्री भारत सरकार द्वारा जानवरों पर प्रयोगों के नियंत्रण और पर्यवेक्षण के उद्देश्य (सीसीएसईए) के लिए समिति के सदस्य के रूप में नामित किया गया है। उन्हें इस समिति का लगातार तीसरी बार सदस्य नियुक्त किया गया है।
यह नियुक्ति पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत पशुपालन और डेयरी विभाग, भारत सरकार द्वारा की गई है। वे मध्य प्रदेश की पहली महिला हैं, जिन्हें सीसीएसईए में सदस्य नामित किया गया है। यह समिति ऐसे सभी उपाय करने के लिए जिम्मेदार होगी, जो यह सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक हो कि जानवरों पर प्रयोगों के प्रदर्शन से पहले, दौरान या बाद में अनावश्यक दर्द या पीड़ा न हो। ज्ञात हो कि प्रो. अस्मिता वर्तमान में कई अन्य राष्ट्रीय समितियों की मेम्बर की हैसियत से कार्य कर रही हैं, जिन्हें मंत्रालय द्वारा नियुक्त किया गया है।
प्रो. अस्मिता पाटिल की इस नियुक्ति पर विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीलिमा गुप्ता ने बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि फार्मेसी विभाग ऐसे ही कार्य करते हुए आगे बढ़ता रहे, विभाग तथा यूनिवर्सिटी के लिए यह गौरव की बात है। विवि के अन्य वरिष्ठ प्रोफेसर्स एवं फार्मेसी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. पाटिल, प्रो जैन, प्रो वंदना सोनी, डॉ धर्मेन्द्र जैन तथा डॉ सुशील काशव सहित विभाग के ऑफिस के समस्त कर्मचारियों द्वारा बधाई दी गई है।
यह बड़ा सम्मान है : प्रो अस्मिता
नियुक्ति को लेकर प्रो. अस्मिता का कहना है कि मेरे लिए सम्मान की बात है कि मुझे तीसरी बार CCSEA के केंद्रीय परिषद सदस्य के रूप में नामित किया गया है। पिछले दो कार्यकालों के दौरान, मैंने पशु अनुसंधान नैतिकता को मजबूत करने, नवाचारों को बढ़ावा देने, और अनुपालन प्रक्रियाओं को अधिक प्रभावी और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया। इसके अलावा, मैंने शोधकर्ताओं और संस्थानों के लिए दिशानिर्देशों के कार्यान्वयन को सुगम बनाने, प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन, और विज्ञान एवं नैतिकता में संतुलन स्थापित करने की दिशा में कार्य किया।
तीसरे कार्यकाल में मेरा लक्ष्य पशु कल्याण और अनुसंधान नैतिकता को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। मैं डिजिटल निगरानी प्रणाली, उन्नत शोध पद्धतियों, और पारदर्शी नियामक प्रक्रियाओं को बढ़ावा देने के लिए कार्य करूंगी। साथ ही, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों के लिए नीति-निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाते हुए आधुनिक तकनीकों, जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैकल्पिक परीक्षण पद्धतियों को अपनाने की दिशा में भी कार्य करने का संकल्प है। मेरा प्रयास रहेगा कि पिछले अनुभवों से सीखते हुए, पशु अनुसंधान में नैतिकता और वैज्ञानिक उत्कृष्टता के नए मानदंड स्थापित किए जाएं।