मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव
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मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भोपाल में दत्तोपंत ठेंगड़ी शोध संस्थान के नवीन भवन के भूमिपूजन कार्यक्रम में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि आज के दौर में वैश्विक परिप्रेक्ष्य में शोध कार्य अत्यंत महत्वपूर्ण है, जिसे बढ़ावा दिए जाने की आवश्यकता है। यदि विश्व में आशा का कोई केन्द्र बचा है, तो वह भारत है। जब सभी प्रश्नों के उत्तर हमें देने हैं, ऐसे में हमें भारतीय प्राचीन ज्ञान परंपरा की ओर अग्रसर होना होगा। हमारे यहां गुरुकुल परंपरा, विश्वविद्यालय परंपरा रही हैं और तक्षशिला, नालंदा जैसे ज्ञान के केन्द्रों ने सम्पूर्ण विश्व से विद्यार्थियों को आकर्षित किया था, जो ज्ञानार्जन के लिए आते थे।
शोध संस्थान का बढ़ा महत्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि जीवन के विविध पक्षों पर शोध कार्य को प्रोत्साहित करने के लिए जिस प्रकार शोध संस्थान का कार्य बढ़ा है, उसी प्रकार वैश्विक परिप्रेक्ष्य में इस संस्थान की आवश्यकता और बढ़ गई है। भारतीय विचारों और चिंतन को जोड़ते हुए यह संस्थान शोध करेगा। जीवन के सभी पक्षों पर शोध कार्य करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि शोध संस्थान के माध्यम से वनवासी और आदिवासी संस्कृति पर शोध की आवश्यकता है। शोध निरंतर चलता रहना चाहिए, कागजी ज्ञान के बजाय शोध का समुचित रूप से महत्व है, जिससे मानव जाति और संस्कृति का भला हो सके।
ऋषि समान चिंतक थे ठेंगड़ी जी
इस मौके पर मुख्यमंत्री ने दत्तोपंत ठेंगड़ी के जीवन परिचय को प्रस्तुत करते हुए कहा कि ठेंगड़ी जी ऋषि समान चिंतक थे। जिस प्रकार दीपक स्वयं जलकर दूसरों को प्रकाश देता है, उसी प्रकार प्रचारक परंपरा में वे उज्जवल नक्षत्र के समान थे, जिनके माध्यम से स्वदेशी आंदोलन, कृषि आंदोलन और मजदूर आंदोलन में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वे विद्यार्थी परिषद के संस्थापक सदस्य भी रहे। ठेंगड़ी जी ने हिंदुत्व को राष्ट्र से आगे बढ़कर विश्व बंधुत्व से जोड़ा।