अंतर्राष्ट्रीय कट्टरपंथी इस्लामिक संगठन हिज्ब उत तहरीर (एचयूटी) के गिरफ्तार 16 संदिग्ध आतंकियों में से 10 की रिमांड पांच दिन बढ़ा दी गई है। शुक्रवार को सभी 16 की रिमांड अवधि पूरी होने पर भोपाल जिला अदालत के विशेष न्यायालय में पेश किया गया। इनमें से छह को जेल भेज दिया गया। जिन 10 की एटीएस रिमांड बढ़ाई गई है, उनमें भोपाल का मास्टर माइंड यासिर खान, बैरसिया निवासी प्रो. सलीम उर्फ सौरभ राजवैद्य भी शामिल है। इन सभी से हथियार खरीदी, रेकी व संगठन के लिए फंडिंग, विदेशी आकाओं से संबंध सहित अन्य बिंदुओं पर एटीएस द्वारा पूछताछ की जानी है।
बता दें, 9 मई को एनआईए की निशानदेही पर मप्र एटीएस ने भोपाल में छापा मारकर 10, छिंदवाड़ा में एक और तेलंगाना एटीएस के सहयोग से हैदराबाद में छापा मारकर पांच संदिग्ध आतंकियों को गिरफ्तार किया था। सभी को पूछताछ के लिए भोपाल जिला अदालत में एनआईए की विशेष अदालत में पेश कर 19 मई तक रिमांड पर लिया गया था। चूंकि, हैदराबाद वालों को भोपाल लाने में दो दिन लग गए, इसके बाद वापस उनके ठिकानों पर दबिश देने के लिए मप्र एटीएस हैदराबाद ले गई थी, लिहाजा उनसे पूछताछ के लिए मप्र एटीएस को बहुत ज्यादा समय नहीं मिला। ऐसे में विशेष न्यायालय ने 10 संदिग्ध आतंकियों को फिर से पांच दिन की रिमांड पर मप्र एटीएस को सौंप दिया। वहीं, भोपाल के पांच और छिंदवाड़ा निवासी अब्दुल करीम को कोर्ट के आदेश के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। बचाव पक्ष ने दलील दी थी कि 10 दिन की रिमांड अवधि में एटीएस उनसे कुछ उगलवा नहीं पाई है।
भोपाल के यह संदिग्ध रिमांड पर
- यासिर खान निवासी शाहजहांनाबाद
- सैयद दानिश अली निवासी ऐशबाग
- सैयद सामी रिजवी
- खालिद हुसैन निवासी लालघाटी के पास
- मो. आलम निवासी इमामबाड़ा भोपाल
हैदराबाद के ये संदिग्ध रिमांड पर
- मोहम्मद सलीम निवासी हैदराबाद
- अब्दुर रहमान निवासी हैदराबाद
- मोहम्मद अब्बास अली निवासी हैदराबाद
- शेत्र जुनैद निवासी हैदराबाद
- मोहम्मद हमीद निवासी हैदराबाद
कड़े पहरे के बीच लाए अदालत
अंतर्राष्ट्रीय कट्टरपंथी संगठन के इन सदस्यों को जो देश विरोधी गतिविधियों में संलग्न थे उन्हें भारी सुरक्षा के बीच शुक्रवार दोपहर में भोपाल जिला अदालत में पेश किया गया। संदिग्धों के अदालत में पहुंचने से पहले ही अदालत में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया था। संदिग्धों को लेकर जब मप्र एटीएस का दस्ता कोर्ट पहुंचा, इससे पहले पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के अधिकारी कोर्ट पहुंच चुके थे। संदिग्धों को कोर्ट पहुंचने से पहले ही एनआईए की विशेष अदालत का रास्ता आम आदमी के लिए बंद कर दिया गया था। सभी को बस में भरकर कोर्ट लाया गया था। आरोपियों के वकीलों के अलावा किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं थी। उनके परिवार के सदस्य भी मिलने आए थे, जिन्हें अलग रोका गया था। पेशी के बाद उनकी मुलाकात कराई गई है।