भोपाल के गरबा पंडालों में धार्मिकता और संस्कृति की रक्षा के लिए साधु-संन्यासियों की टीम नजर रखेगी। धर्म की आड़ में अश्लीलता और फूहड़ता फैलाने वालों को रोकने के लिए भगवा दलों का गठन भी किया गया है। साधु-सन्यासियों के दल अलग-अलग पंडालों का निरीक्षण करेंगे। अखिल भारतीय साधु-संत संन्यासी समिति ने आयोजकों से मांग की है कि गरबा में केवल पूर्ण परिधान के साथ भजन आधारित कार्यक्रम आयोजित किया जाए। आयोजन में देवी उपासना और आरती के बाद ही गरबा की शुरुआत हो। उन्होंने कहा कि साधु-संन्यासियों के दल अलग-अलग पंडालों का निरीक्षण करेंगे। इस दौरान प्रशासनिक अधिकारी, पुलिस और जनप्रतिनिधि भी मौजूद रहेंगे। साधु-संन्यासी अधर्मियों को रोकने और धर्म की रक्षा करने के लिए सक्रिय भूमिका निभाएंगे।
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भाईजान को नो एंट्री : सांसद शर्मा
भोपाल सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि गरबा पंडाल में हिंदी और सनातनी ही आएं। उन्होंने कहा कि भाईजान की एंट्री नहीं होगी। उन्होंने चेतावनी दी कि किसी भी अन्य समुदाय के लोग, विशेषकर मुस्लिम गरबा में प्रवेश न करें। उन्होंने कहा कि टीका लगाकर या कलावा बांधकर लव जिहादी प्रवेश न करें। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि त्योहार की पवित्रता बनाए रखने के लिए धार्मिक अनुशासन जरूरी है।
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वराह अवतार की तस्वीर लगाकर पूजन के बाद दें प्रवेश
उधर, हिंदू उत्सव समिति एवं संस्कृति बचाओ मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने गरबा आयोजकों को चेतावनी दी है कि किसी भी हाल में गरबे में मुस्लिम लोग प्रवेश न करें। साथ ही गरबा आयोजन में सिर्फ धार्मिक गीत बजें और गरबा स्थल पर मां भगवती की प्रतिमा या तस्वीर रखकर उनकी आराधना एवं आरती के पश्चात गरबा प्रारंभ करें। गरबे को मां की आराधना के अलावा व्यावसायिक रूप से प्रयोग ना किया जाए। संस्कृति बचाओ मंच ने यह भी कहा है कि हो सके तो गरबा पंडाल के बाहर वराह अवतार (भगवान विष्णु के अवतार) की फोटो लगाकर उसकी पूजन कर प्रवेश दें, ताकि जेहादी उसमें प्रवेश न कर सके। तिवारी ने कहा कि माताएं बहनें इस बात का ध्यान रखें कि हम सनातन धर्म के कार्य को दूषित न करें। गरबे पंडाल में अर्धनग्न होकर गरबा ना करें पूर्ण परिवेश में मां भगवती की आराधना करें, जिससे कि हमारा धर्म दूषित ना हो।