ललित मोहन बेलवाल और सुषमा रानी शुक्ला
- फोटो : अमर उजाला
मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) की कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए हैं। इस मामले में एफआईआर दर्ज होने के करीब दो साल बाद भी मामले में चालान पेश नहीं किया गया है। सोशल एक्टिविस्ट भूपेंद्र प्रजापति ने शुक्रवार को ईओडब्ल्यू के डीजी को शिकायत पत्र सौंपा और आरोप लगाया कि विभागीय जांच में चार अधिकारियों-कर्मचारियों को दोषी माना गया था। इनमें आजीविका मिशन के पूर्व सीईओ ललित मोहन बेलवाल, अतिरिक्त सीईओ विकास अवस्थी, राज्य परियोजना प्रबंधक सुषमा रानी शुक्ला और कर्मचारी संतोष कुरुप का नाम शामिल है। आरोप है कि एफआईआर में संतोष कुरुप को नामजद नहीं किया गया, जबकि विभागीय जांच में उनका नाम दोषियों में शामिल था। प्रजापति ने यह भी आरोप लगाया कि एफआईआर के बाद सुषमा रानी शुक्ला को विभाग से हटा दिया गया, जबकि संतोष कुरुप अब भी विभाग में कार्यरत हैं।