गांधी सागर अभयारण्य में 64 किमी को बाड़ा तैयार कर लिया गया है। यहां पर करीब 28 किमी की फेंसिंग का काम करीब करीब पूरा हो गया है। इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 17 से 18 करोड़ के आसपास है। अगले माह यानी फरवरी में चीतों के लिए अभयारण्य पूरी तरह तैयार हो जाएगा। इसके बाद चीतों को लाने का निर्णय होगा। केंद्र सरकार की किसी अफ्रीकी देश से चीते लाने को लेकर चर्चा चल रही है। गांधी सागर अभयारण्य का क्षेत्र छोटा है। इसलिए यहां पर 5 से 6 चीतों को ही लाकर रखा जाएगा।
बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर सबसे पहले 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से लाए गए आठ चीते श्योपुर जिले में स्थित कूनो नेशनल पार्क में छोड़े गए थे। इसके बाद 18 फरवरी को 2023 को दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते कूनो नेशनल पार्क में लाकर छोड़े गए। कूनो के जंगल में कुल 20 चीते लाए गए। इनमें से छह चीतों की मौत हो गई है। कूनो में अभी 14 बड़े चीते हैं और एक शावक है। वहीं, तीन नए शावकों ने अभी जन्म लिया है। कूनो नेशनल पार्क में एक-एक कर चीतों को खुले जंगल में छोड़ा जा रहा है। अब तक दो को ही खुले में छोड़ा गया है। कूनो नेशनल पार्क में चीता सफारी की भी शुरूआत कर दी गई।
कूनो से शिफ्ट नहीं होंगे चीते
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) असीम श्रीवास्तव ने बताया कि गांधी सागर अभयारण्य में कूना से चीते शिफ्ट नहीं किए जाएंगे। वहां विदेश से नए चीते लाए जाएंगे। इसका निर्णय केंद्र सरकार करेगी। अभयारण्य में तैयारी अंतिम दौर में है।