बीना की विधायक निर्मला सप्रे की विधानसभा सदस्यता रद्द करने के लिए कांग्रेस द्वारा दायर याचिका के दस्तावेज विधानसभा से गायब होने का मामला सामने आया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इसे गंभीर बताते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने की बात कही है। वहीं, विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने याचिका के कागज गायब होने से इनकार किया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सागर जिले की बीना से विधायक निर्मला सप्रे की सदस्यता समाप्त करने को लेकर उनके खिलाफ दायर याचिका को लेकर उनके विधानसभा अध्यक्ष को सौंपे कागज गायब होने की बात कही है। सिंघार ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष को नियम अनुसार समय पर याचिका सौंपी गई थी, लेकिन 90 दिन बाद पता चला कि याचिका के दस्तावेज गायब हो गए हैं। उन्होंने कहा कि अब हाईकोर्ट में जाकर सदस्यता रद्द करने की मांग करेंगे। उमंग सिंघार ने निर्मला सप्रे पर आरोप लगाया कि वे खुले तौर पर पार्टी विरोधी गतिविधियों में संलग्न हैं और भाजपा की बैठकों में हिस्सा ले रही हैं। उन्होंने कहा कि निर्मला सप्रे भाजपा की गतिविधियों में पूरी तरह लिप्त हैं और उन्होंने पार्टी के खिलाफ जाकर भाजपा में समर्थन जताया है।
विधानसभा सचिव का बयान
विधानसभा के प्रमुख सचिव एपी सिंह ने याचिका के कागज गायब होने के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनको लगता है कि विधानसभा अध्यक्ष ने केवल याचिका के परीक्षण के लिए कुछ दस्तावेज मांगे होंगे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि सदस्य के खिलाफ पार्टी स्तर पर कौन-सी कार्रवाई हुई है। उन्होंने कहा कि कोई कागज गुम नहीं हुआ है।
सीएम की मौजूदगी में पहना था भाजपा का दुपट्टा
लोकसभा चुनाव के दौरान सागर जिले के राहतगढ़ में एक जनसभा के दौरान विधायक निर्मला सप्रे ने मंच पर मुख्यमंत्री के हाथों से भाजपा का दुपट्टा पहना था। सप्रे ने बीना के विकास के लिए भाजपा का साथ देने की बात कही थी, जिसके बाद से वे लगातार भाजपा के कार्यक्रमों और बैठकों में भाग ले रही हैं। हाल ही में सप्रे भोपाल में भाजपा कार्यालय में एक बैठक में शामिल हुई थीं। उस समय उन्होंने भाजपा की सदस्यता लेने की बात से इंकार किया था। अब कांग्रेस उनकी सदस्यता को चुनौती देने हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रही है।