प्रदेश में किसानों के बीच खाद संकट के आरोपों पर पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह और पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के बयानों के जवाब में कृषि मंत्री एदल सिंह कंषाना ने शुक्रवार को पलटवार किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि मध्यप्रदेश में उर्वरकों की कोई कमी नहीं है और विपक्षी नेता किसानों को भ्रमित कर रहे हैं।
श्यामला हिल्स स्थित निवास पर मीडिया से चर्चा करते हुए कृषि मंत्री कंषाना ने कहा कि हमने खरीफ के सीजन में किसानों को आवश्यक मात्रा में उर्वरक उपलब्ध कराया है और रबी में भी इसी प्रकार किसानों की जरूरतों के अनुसार उर्वरक उपलब्ध कराए जाएंगे। विपक्षी पार्टी जानबूझकर किसानों को गलत जानकारी देकर भ्रम फैला रही है। विपक्षी पार्टी द्वारा किसानों भ्रमित जानकारी दी जा रही है। इस साल अंतरराज्यीय बाजार में डीएपी कीमतों में भारी उतार चढ़ाव का कारण यूक्रेन और इजराइल का युद्ध है। इनके संघर्ष के कारण आपूर्ति में बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है।
मंत्री कंषाना ने बताया कि खरीफ 2024 में 32.97 लाख मीट्रिक टन की मांग के मुकाबले 33.69 लाख मीट्रिक टन उर्वरक उपलब्ध कराया गया है, जो पिछले वर्ष से अधिक है। इसी तरह, रबी 2024 के लिए 41.10 लाख मीट्रिक टन की मांग के विरुद्ध 19 लाख मीट्रिक टन उर्वरक अब तक उपलब्ध कराया जा चुका है। इनमें 7.74 लाख मीट्रिक टन यूरिया, 5.21 लाख मीट्रिक टन डीएपी और 6.05 लाख मीट्रिक टन एसएसपी शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश अग्रिम भंडारण की नीति अपनाता है, ताकि किसी भी समय किसानों को उर्वरकों की कमी का सामना न करना पड़े। इस वर्ष रबी सीजन की शुरुआत में राज्य ने पहले ही 6.55 लाख मीट्रिक टन उर्वरक का अग्रिम भंडारण कर लिया था। भारत सरकार से भी राज्य को पर्याप्त उर्वरक मिल रहे हैं, जिससे किसानों को उनकी मांग के अनुसार समय पर उर्वरक उपलब्ध कराया जाएगा।
मंत्री कंषाना ने यह भी कहा कि सरकार उर्वरकों की गुणवत्ता पर खास ध्यान दे रही है। यदि कहीं भी घटिया गुणवत्ता के उर्वरक, बीज, या कीटनाशक बेचे जाने की सूचना मिलती है, तो सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और दोषियों के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज होगी।
दिग्विजय सिंह ने क्या लगाए थे आरोप
गुरुवार को एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह और पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने कहा था कि मध्यप्रदेश में खाद संकट के लिए केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव जिम्मेदार हैं। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस सरकार के समय (1993-2003) में खाद की कोई कमी नहीं थी और न ही कोई कालाबाजारी हुई थी, जबकि आज खाद की ब्लैक मार्केटिंग और नकली खाद के मामले सामने आ रहे हैं।