भोपाल में राजकुमार केसवानी सम्मान डॉ. वर्तिका नंदा को दिया गया।
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विख्यात पत्रकार स्वर्गीय राजकुमार केसवानी जी की स्मृति में उनके नाम पर पहला सम्मान रविवार को पत्रकार डॉ. वर्तिका नंदा को दिया गया। नंदा को सम्मान स्वरूप एक लाख रुपये की राशि, शॉल-श्रीफल दिया गया।
भोपाल के माधवराव सप्रे समाचार-पत्र संग्रहालय में केसवानी की स्मृति में अलंकरण समारोह आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में गीतकार और लेखक इरशाद कामिल, अभिनेता राजीव वर्मा और फिल्म राइटर रूमी जाफरी विशेष रूप से उपस्थित थे। इसके साथ ही पद्मश्री विजय दत्त श्रीधर, राजेश बादल अशोक मनवानी सहित पत्रकारिता जगत की अन्य हस्तियां और स्वर्गीय केसवानी के बेटे रौनक केसवानी व अन्य परिजन कार्यक्रम में मोजूद रहे।
सम्मान समारोह में मौजूद लोग।
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याद है आधे घंटे की मुलाकात
गीतकार इरशाद कामिल ने केसवानी से अपनी पहली मुलाकात को याद करते हुए कहा कि कमरा है कमरे में अंधेरा है, एक टेबल लैंप है एक फ़ोन बजता है, वो ध्यान में फ़ोन उठा लेते हैं कोई पूछता है क्या कर रहे ह , बोलते हैं सोच रहा हूं, मैंने केसवानी जी को बोला मैंने कभी सोचा नहीं मैं लिखता क्यों हूं। कामिल ने बताया कि उनसे मेरी पहली मुलाक़ात दिल्ली में हुई। आधे घंटे की इस मीटिंग में ही मेरे ज़हन में उनकी शख़्सियत बस गई। उन्होंने समझा कलम एक धर्म है। इसकी ज़िम्मेदारी उठाना होती है। समाज के लिए उन्होंने लिखा। ऐसे इंसान के बारे में जितना कहा जा सकता है कम है।
कौन थे केसवानी
राजकुमार केसवानी अपनी खोजी पत्रकारिता के लिए जाने जाते थे। उनकी लेखनी का हर कोई मुरीद था। अखबारों में उनके कॉलम चर्चा में रहते थे। वे कई संस्थानों में मुख्य पदों पर रहे। उन्होंने पत्रकारिता के क्षेत्र में कई नए पत्रकारों को तैयार किया। प्रिंट और टीवी पत्रकारिता दोनों पर उनकी जबरदस्त कमान थी। कोरोना काल में उनकी मृत्यु हो गई थी।